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Foundations & Conditions जुल 13, 2026

ज़कात के क़ाबिल माल में 'बढ़ोतरी' (नमा) की शर्त

प्रश्न

ज़कात सिर्फ़ 'बढ़ने वाले' माल पर क्यों फ़र्ज़ है, और इससे ज़ाती इस्तेमाल की चीज़ें कैसे मुस्तसना (छूट में) हो जाती हैं?

निर्णय (फतवा)

मुख़्तसर जवाब: ज़कात उस माल पर फ़र्ज़ है जिसमें बढ़ने या इज़ाफ़े की सलाहियत हो (नमा), जैसे मवेशी, तिजारती सामान, ज़िराअती पैदावार और तिजारत के लिए इस्तेमाल होने वाला सोना-चांदी। ज़ाती इस्तेमाल की चीज़ें जैसे रहाइशी मकान, लिबास, फ़र्नीचर और ज़ाती इस्तेमाल की सवारियां ज़कात से मुस्तसना हैं, क्योंकि ये बढ़ने के लिए नहीं बल्कि ज़ाती ज़रूरत के लिए होती हैं। तफ़सील: 'बढ़ोतरी' (नमा) की शर्त क़ुरआन और सहीह हदीस से ली गई है। अल्लाह तआला सूरह अर-रूम 30:39 में फ़रमाते हैं कि जो ज़कात अल्लाह की रज़ा के लिए दी जाए वह कई गुना बढ़ती है, जिससे मालूम होता है कि ज़कात उस माल पर है जो बढ़ सकता है। सहीह बुख़ारी 1403 में नबी ﷺ ने ज़कात अदा किए बिना माल जमा करने पर तंबीह फ़रमाई। सहीह बुख़ारी 1454 में मज़कूर तफ़सीली फ़राइज़ में ऊंट, गाय, बकरी, सोना, चांदी और ज़िराअती पैदावार पर ज़कात का ज़िक्र है – ये सब पैदावारी (बढ़ने वाले) माल हैं। नबी ﷺ ने मुआज़ रज़ियल्लाहु अन्हु को यमन भेजा (सहीह बुख़ारी 1395) ताकि यह सिखाएं कि ज़कात मालदारों से ली जाए और ग़रीबों को दी जाए, और यह सिर्फ़ उस ज़ाइद (फ़ालतू) माल पर फ़र्ज़ है जो बढ़ सकता हो। सूरह अत-तौबा 9:34-35 में उन लोगों की मज़म्मत की गई है जो सोना-चांदी जमा करते हैं और उसकी ज़कात अदा नहीं करते, जिससे मालूम होता है कि ऐसा माल ज़कात के ताबे है क्योंकि वह बढ़ने के क़ाबिल है। ज़ाती इस्तेमाल की चीज़ें 'जमा किया हुआ' (कंज़) माल शुमार नहीं होतीं और उन पर ज़कात फ़र्ज़ नहीं, क्योंकि वे तिजारत या इज़ाफ़े के लिए नहीं होतीं। दलाइल: 1. क़ुरआन 30:39: ज़कात अल्लाह की तरफ़ से इज़ाफ़ा लाती है। 2. क़ुरआन 9:34-35: ज़कात के बिना सोना-चांदी जमा करना मज़मूम (बुरा) है। 3. सहीह बुख़ारी 1403: ज़कात अदा न करने पर अज़ाब की वईद। 4. सहीह बुख़ारी 1454: पैदावारी माल पर ज़कात की तफ़सील। 5. सहीह बुख़ारी 1395: मालदारों पर ज़कात की फ़र्ज़ियत। तंबीह: यह फ़तवा फ़राहम कर्दा दलाइल की बुनियाद पर है। पेचीदा मसाइल में किसी साहिब-ए-इल्म आलिम से रुजू करें।

संदर्भ

Quran Surah Ar-Rum 30:39; Surah At-Tawbah 9:34-35
Hadith Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1395
Fiqh Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
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