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Pension & GPF जुल 13, 2026

ग्रैच्युटी की रक़म पर ज़कात

प्रश्न

मेरा एम्प्लॉयर नौकरी के इख़्तिताम पर ग्रैच्युटी अदा करता है। क्या मुझे नौकरी के दौरान इसका हिसाब करना होगा, या वसूल करने के बाद ही?

निर्णय (फतवा)

मुख़्तसर जवाब: ग्रैच्युटी हाथ में आने से पहले उस पर कोई ज़कात नहीं — नौकरी के दौरान यह आपकी मिल्कियत का माल है ही नहीं, महज़ एम्प्लॉयर के ज़िम्मे एक वादा की हुई देनदारी है, जिसकी रक़म भी अभी तय नहीं। वसूली के दिन से यह नक़द माल बन जाती है, जिसकी ज़कात निसाब और हौल पूरा होने के बाद अदा की जाएगी। नौकरी के पिछले सालों की कोई बक़ाया ज़कात नहीं। तफ़सील: ज़कात के लिए मुकम्मल मिल्कियत शर्त है। मंज़ूरी और अदायगी से पहले आप न ग्रैच्युटी का दावा कर सकते हैं न उसे ख़र्च कर सकते हैं, और उसकी रक़म मुद्दते-मुलाज़मत और आख़िरी तनख़्वाह पर मुनहसिर है। लिहाज़ा यह मुस्तक़बिल का माल है; हिसाब क़ब्ज़े के बाद शुरू होता है। इसके बाद आसान तरीक़ा यह है कि इसे अपने मौजूदा सालाना यौमे-ज़कात में शामिल कर लें। दलाइल: क़ुरआन 9:103 ('उनके मालों से' — मिल्कियत से पहले लागू ही नहीं होता); इब्ने माजा 1792 (हौल); और वह उसूल जो अल-लजना अद-दाइमा (मुस्तक़िल फ़तवा कमेटी) और मौजूदा दौर के उलमा ने मुलाज़मत के इख़्तिताम की रक़मों पर लागू किया है। पेचीदा इनफ़िरादी सूरतों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजूअ करें।

संदर्भ

Quran Quran 9:103
Hadith Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani
Fiqh Permanent Committee on end-of-service benefits
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