← फतवों पर वापस
Real Estate जुल 13, 2026

दोबारा बेचने की नीयत से ख़रीदी गई जायदाद की ज़कात

प्रश्न

मैंने मुनाफ़े पर बेचने की नीयत से ज़मीन ख़रीदी थी — बरसों से बिक नहीं पाई। क्या मुझ पर हर साल इसकी ज़कात वाजिब है?

निर्णय (फतवा)

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ। बेचने की पक्की नीयत से ख़रीदी गई ज़मीन या फ़्लैट उरूज़े-तिजारत (कारोबारी माल) हैं — हर साल आपके ज़कात के दिन उस दिन की बाज़ारी क़ीमत का 2.5% अदा करना वाजिब है, चाहे वह कितने ही साल बिना बिके पड़ी रहे। तफ़सील: क़ीमत उस दिन के मुनासिब बाज़ारी भाव से लगाएँ, अपनी ख़रीद की क़ीमत से नहीं। अगर नक़द रक़म पास न हो तो उलमा ने गुंजाइश दी है कि हर साल की ज़कात का हिसाब लिखकर महफ़ूज़ रखें और ज़मीन बिकते ही तमाम जमा हुए सालों की ज़कात एक साथ अदा कर दें — यह ज़िम्मे पर क़र्ज़ रहती है, कभी माफ़ नहीं होती। अगर आपकी नीयत वाक़ई बदल जाए (मसलन वहाँ अपना घर बनाने का फ़ैसला कर लें) तो उसी दिन से वह कारोबारी माल नहीं रहती और ज़कात रुक जाती है; लेकिन महज़ बेहतर क़ीमत के इंतिज़ार में रोके रखना नीयत की तब्दीली नहीं। दलाइल: क़ुरआन 2:267; सहीह बुख़ारी 1 (आमाल का दारोमदार नीयतों पर है — कारोबारी माल होना नीयत ही से तय होता है); लजना दाइमा और शैख़ इब्ने बाज़ के फ़तवे कि बेचने के लिए रखी गई ज़मीन की ज़कात हर साल बाज़ारी क़ीमत पर वाजिब है, और जिसके पास नक़द न हो उसके लिए बिक्री के बाद अदायगी की इजाज़त है। पेचीदा इनफ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।

संदर्भ

Quran Quran 2:267
Hadith Sahih al-Bukhari 1
Fiqh Permanent Committee; Ibn Baz
0
स्मार्ट गोल्ड ट्रेड सहायता
हमारी टीम जवाब देगी
एक चैट शुरू करें
हमारी टीम खुद जवाब देती है। सब व्यस्त हों तो हम ईमेल करेंगे — इसलिए आपका पता चाहिए।

ईमेल पर भेजा गया 6 अंकों का कोड डालें