प्रश्न
मैंने म्यूचुअल फ़ंड या इंडेक्स फ़ंड के यूनिटों में सरमायाकारी की है। इनकी ज़कात कैसे अदा करूँ?
निर्णय (फतवा)
मुख़्तसर जवाब: फ़ंड के यूनिट दरअसल उनके पीछे मौजूद शेयर-असासों की नुमाइंदगी करते हैं, इसलिए उनका हुक्म भी वही है जो शेयरों का है। अगर यूनिट कैपिटल गेन (मुनाफ़े पर बेचने) की नीयत से रखे हों तो ज़कात के दिन उनकी पूरी NAV/बाज़ारी क़ीमत का 2.5% अदा करें; और अगर लंबी मुद्दत की आमदनी की नीयत से रखे हों तो लंबी मुद्दत वाले शेयरों के दोनों तरीक़ों में से कोई भी अपनाया जा सकता है — जिनमें पूरी क़ीमत पर ज़कात देना सबसे आसान और एहतियात वाला तरीक़ा है।
तफ़सील: ज़्यादातर सरमायाकार फ़ंड इसी नीयत से ख़रीदते हैं कि क़ीमत बढ़ने पर भुना लेंगे — ऐसी सूरत में यह माल-ए-तिजारत है और पूरी क़ीमत पर ज़कात वाजिब है। जिन फ़ंडों में सूदी बॉन्ड या हराम शोबों की कंपनियाँ शामिल हों, उनमें सरमायाकारी शरीअत के मुताबिक़ नहीं; शरई स्क्रीनिंग वाले फ़ंड चुनें। अगर पहले ही किसी मिले-जुले फ़ंड में सरमाया लगा हो तो हराम ज़रिए से हासिल आमदनी के हिस्से की तत्हीर लाज़िम है (सवाब की नीयत के बग़ैर निकाल दिया जाए) — और यह ज़कात में शुमार नहीं होगा।
दलाइल: क़ुरआन 2:267; सहीह बुख़ारी 1 («आमाल का दारोमदार नीयतों पर है» — नीयत ही तय करती है कि मामला तिजारत का है या लंबी मुद्दत तक रखने का); AAOIFI शरई स्टैंडर्ड 35; और लजना दाइमा (स्थायी फ़तवा कमेटी) के शेयरों की ज़कात से मुताल्लिक़ फ़तवों के उसूल।
पेचीदा इनफ़िरादी सूरतों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
संदर्भ
Quran
Quran 2:267
Hadith
Sahih al-Bukhari 1
Fiqh
AAOIFI Std 35; Permanent Committee