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Cryptocurrency जुल 13, 2026

हराम तरीक़ों से कमाई गई क्रिप्टो — क्या ज़कात उसे पाक कर देती है?

प्रश्न

पहले मैंने जुए की वेबसाइटों और स्कैम स्कीमों के ज़रिए क्रिप्टो कमाई। अब मैं तौबा करना चाहता हूँ — क्या उस पर ज़कात अदा करने से यह माल पाक हो जाएगा?

निर्णय (फतवा)

मुख़्तसर जवाब: नहीं। ज़कात हलाल माल को पाक करती है; हराम कमाई का इलाज ज़कात नहीं बल्कि उससे पूरी तरह दस्तबरदार होना है: (क) जो माल पहचाने जा सकने वाले पीड़ितों से धोखे के ज़रिए लिया गया हो, उसे उन्हीं को लौटाना वाजिब है; (ख) जहाँ मालिकों की पहचान मुमकिन न हो (जुए के पूल वग़ैरा), वहाँ पूरा हराम हिस्सा सवाब की नीयत के बिना ग़रीबों या जनकल्याण में दे दिया जाए। इनमें से कोई भी ज़कात नहीं गिना जाएगा, और 2.5% देकर बाक़ी माल अपने पास रखने की कोई गुंजाइश नहीं। तफ़सील: अल्लाह पाक है और सिर्फ़ पाक चीज़ ही क़बूल फ़रमाता है — हराम माल से 'सदक़ा' भी क़बूल नहीं होता, ज़कात तो दूर की बात है। तौबा के लिए गुनाह छोड़ना, नदामत, आइंदा न करने का पक्का इरादा और लोगों के हक़ों की वापसी ज़रूरी है। जहाँ हलाल और हराम मिल गए हों, वहाँ हराम के अंदाज़न हिस्से को एहतियात के साथ (शक की सूरत में ज़्यादा की तरफ़ झुकते हुए) अलग करके उससे दस्तबरदार हो जाएँ; बाक़ी हलाल माल आपका है और उस पर हस्बे-मामूल ज़कात वाजिब होगी। दलाइल: सहीह मुस्लिम 1015; क़ुरआन 2:188; क़ुरआन 5:90; सहीह बुख़ारी 1410 (सदक़ा सिर्फ़ हलाल कमाई से क़बूल होता है); हराम माल से दस्तबरदारी के वुजूब पर लजना दाइमा और शैख़ इब्न बाज़ के फ़तावा। पेचीदा इनफ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।

संदर्भ

Quran Quran 2:188; 5:90
Hadith Muslim 1015; Bukhari 1410
Fiqh Permanent Committee; Ibn Baz on divesting haram wealth
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