एसजीटी फतवा लाइब्रेरी आधुनिक परिसंपत्तियों की ज़कात पर सत्यापित इस्लामी फ़ैसले एकत्र करती है — क्रिप्टोकरेंसी, शेयर, पेंशन और जीपीएफ, रियल एस्टेट, तथा ऋण। प्रत्येक फतवा कुरान, हदीस और विद्वानों के संदर्भ देता है ताकि आप विश्वास से लागू कर सकें। हेडर भाषा स्विचर और नीचे फ़िल्टर इस्तेमाल करें, फिर कोई प्रविष्टि खोलकर पूरा फ़ैसला और प्रमाण पढ़ें।
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विदेशी शेयरों और मल्टी-करेंसी पोर्टफ़ोलियो की ज़कात
मेरी दौलत अमेरिकी शेयरों, एक डॉलर अकाउंट और मक़ामी (स्थानीय) शेयरों में फैली हुई है। ज़कात किस करेंसी में और किस रेट पर हिसाब करूँ?
मुख़्तसर जवाब: हर चीज़ को अपनी ज़कात के दिन के राइज (प्रचलित) एक्सचेंज रेट पर एक ही करेंसी (आम तौर पर अपने मुल्क की करेंसी) में तब्दील करके सबको जोड़ लें। अगर कुल रक़म निसाब से ज़्यादा हो जाए तो 2.5% अदा करें — किसी भी करेंसी में, …
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1454; Muslim 1587• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on currencies
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बोनस शेयर और राइट्स शेयर की ज़कात
कंपनी ने मुझे बोनस शेयर दिए हैं, और मैंने राइट्स इशू में दरख़्वास्त देकर रक़म भी जमा की है। इन दोनों की ज़कात कैसे शुमार करूँ?
मुख़्तसर जवाब: (1) बोनस शेयर असल होल्डिंग के ताबे हैं — अलग से कुछ नहीं करना; अगर ट्रेडिंग पोर्टफोलियो में हों तो अपने ज़कात के दिन कुल मार्केट वैल्यू (बोनस समेत) का 2.5% अदा करें; अगर लंबी मुद्दत की होल्डिंग हो तो लंबी मुद्दत का …
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454• Fiqh: Permanent Committee; al-Uthaymin
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सुकूक और पारंपरिक बॉन्ड पर ज़कात
मैंने सरकारी सुकूक में निवेश किया है, और इससे पहले कुछ पारंपरिक बॉन्ड/डिबेंचर भी ख़रीदे थे। दोनों का शरई हुक्म और ज़कात क्या है?
मुख़्तसर जवाब: (1) वाक़ई असास पर आधारित सुकूक (हक़ीक़ी असासों/प्रोजेक्ट्स में मिल्कियत, नफ़ा-नुक़सान की सच्ची शिरकत के साथ): जायज़ हैं; इनकी ज़कात — अगर तिजारत की नीयत से रखे हों तो बाज़ारी क़ीमत पर (2.5%), और अगर लंबी मुद्दत के लिए रखे…
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Quran: Quran 2:275, 2:279• Hadith: Sahih Muslim 1598• Fiqh: AAOIFI; Islamic Fiqh Academy Jeddah
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नाबालिग़ बच्चे के नाम पर की गई सरमायाकारी की ज़कात
मैं अपने बच्चे के मुस्तक़बिल के लिए उसके नाम पर सरमायाकारी करता हूँ — हक़ीक़त में वह मैंने उसे हिबा कर दिया है। क्या नाबालिग़ के माल पर ज़कात है, और उसे कौन अदा करेगा?
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ — जम्हूर उलमा (इमाम मालिक, शाफ़िई, अहमद; और यही शैख़ इब्न बाज़ और शैख़ उसैमीन का फ़तवा है) के नज़दीक नाबालिग़ और मजनून (पागल) के माल पर भी ज़कात फ़र्ज़ है, क्योंकि ज़कात माल ही से मुताल्लिक़ हक़ है — मालिक का मुकल्लफ़ ह…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1395; athar of Umar, Muwatta• Fiqh: majority; Ibn Baz; al-Uthaymin
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क्या ज़कात हिस्सेदारी (शेयर) के रूप में अदा की जा सकती है?
नक़दी की तंगी है मगर मेरे पास शेयर मौजूद हैं। क्या मैं बराबर क़ीमत के शेयर मुंतक़िल (ट्रांसफ़र) करके ज़कात अदा कर सकता हूँ?
मुख़्तसर जवाब: जायज़ है बशर्ते कि पूरी क़ीमत मुस्तहिक़ तक पहुँचे और वाक़ई उसके काम आए — नक़दी और माले-तिजारत की ज़कात में असल एतबार बराबर क़ीमत की अदायगी का है। शर्तें: (1) मुस्तहिक़ शेयर वसूल करने और बेचने की इस्तिताअत रखता हो और राज़…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1395, 1428• Fiqh: Permanent Committee; al-Uthaymin on paying by value
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फ्यूचर्स, ऑप्शंस और शॉर्ट सेलिंग
मेरा ब्रोकर फ्यूचर्स, ऑप्शंस और शॉर्ट सेलिंग की सुविधा देता है। क्या ये जायज़ हैं? और ऐसी पोज़ीशनों में लगे हुए पैसे की ज़कात का क्या हुक्म है?
मुख़्तसर जवाब: दलील पर आधारित उलमा और फ़िक़्ह अकादमियों का फ़ैसला यह है: (1) शॉर्ट सेलिंग — यानी जो चीज़ आपकी मिल्कियत में नहीं उसे बेचना — हदीस की सरीह मुमानिअत में दाख़िल है: नाजायज़। (2) प्रचलित फ्यूचर्स/ऑप्शंस — जिनमें दोनों मुआवज़…
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Quran: Quran 5:90• Hadith: Abu Dawud 3503; Muslim 1513• Fiqh: Islamic Fiqh Academy Jeddah; contemporary scholars
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घाटे में चल रहे पोर्टफोलियो की ज़कात
मैंने 10 लाख के शेयर ख़रीदे थे, अब उनकी क़ीमत 6 लाख है। मैं घाटे में हूँ — क्या फिर भी ज़कात वाजिब है? और किस चीज़ पर?
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ — घाटा ज़कात को साक़ित नहीं करता; लेकिन हिसाब आज की असल बाज़ार क़ीमत (6 लाख) पर होगा, ख़रीद क़ीमत पर नहीं। आपके यौम-ए-ज़कात पर पोर्टफोलियो की जो क़ीमत बने, बशर्ते कि आपका कुल माल निसाब से ऊपर हो, उसी का 2.5% अ…
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Quran: Quran 2:286; 9:103• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on market valuation
Real Estate
औलाद को जायदाद का हिबा: इंसाफ़ और ज़कात
मैं अपनी ज़िंदगी में औलाद के दरमियान ज़मीन और फ़्लैट तक़सीम करना चाहता हूँ। शरीयत में इसके क्या अहकाम हैं, और हिबा के बाद ज़कात किसके ज़िम्मे होगी?
मुख़्तसर जवाब: (1) ज़िंदगी में औलाद को हिबा करना जायज़ है — लेकिन बेटों और बेटियों के दरमियान इंसाफ़ (बराबरी) वाजिब है: नबी करीम ﷺ ने एक औलाद को ख़ास अतिया देने पर गवाह बनने से इनकार फ़रमाया और उसे ज़ुल्म क़रार दिया। (2) हिबा क़ब्ज़…
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Quran: Quran 4:11• Hadith: Bukhari 2587; Muslim 1623• Fiqh: majority on equality in gifts to children
Real Estate
जायदाद की बिक्री से हासिल रक़म की ज़कात
मैंने पुश्तैनी ज़मीन बड़ी रक़म में बेची है — कुछ रक़म से दूसरा फ़्लैट ख़रीदूँगा, बाक़ी बैंक में पड़ी है। इस रक़म पर ज़कात कब से वाजिब होगी?
मुख़्तसर जवाब: चूँकि ज़मीन माल-ए-तिजारत नहीं थी (पुश्तैनी/ज़ाती), इसलिए उसकी क़ीमत का हौल बिक्री के दिन से शुरू होगा — जब यह रक़म आपके हाथ या बैंक में एक क़मरी (चाँद का) साल पूरा कर ले तो ज़कात वाजिब होगी। इससे पहले जो रक़म फ़्लैट क…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 1792; Bukhari 1454• Fiqh: al-Uthaymin; Permanent Committee
Real Estate
व्यापारिक फ़ार्मों की ज़कात (मछली, पोल्ट्री, गाय मोटी करने के फ़ार्म)
मैं मछली का घेर, पोल्ट्री शेड और ईद के मौसम के लिए गाय मोटी-ताज़ा करने का फ़ार्म चलाता हूँ। क्या इन सबकी ज़कात मवेशियों के ख़ास निसाबों (30 गाय, 40 बकरियाँ) के हिसाब स…
मुख़्तसर जवाब: नहीं — मवेशियों के ख़ास निसाब (हर 30 गायों पर एक तबीअ वग़ैरह) सिर्फ़ साइमा जानवरों पर लागू होते हैं: यानी वे जो साल का ज़्यादातर हिस्सा खुली चरागाह में चरते हों और दूध और नस्ल बढ़ाने के लिए पाले जाएँ। फ़ार्म की मछली, …
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Bukhari 1454, 1464• Fiqh: majority; Permanent Committee on fed/trade animals
Real Estate
वक़्फ़ जायदाद की ज़कात
हमारी ख़ानदानी ज़मीन का एक हिस्सा मस्जिद और मदरसे के लिए वक़्फ़ है; एक वक़्फ़ दुकान का किराया मदरसे को जाता है। क्या वक़्फ़ के माल पर ज़कात वाजिब है?
मुख़्तसर जवाब: जो जायदाद आम या दीनी मक़ासिद (मस्जिद, मदरसा, फ़ुक़रा) के लिए वक़्फ़ कर दी जाए — और उसकी आमदनी भी — उस पर ज़कात नहीं: वक़्फ़ होते ही वह ज़ाती मिल्कियत से निकलकर अल्लाह के लिए महबूस हो जाती है, जबकि ज़कात की शर्त ही किसी मुत…
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Quran: Quran 3:92• Hadith: Bukhari 2737; Muslim 1632, 1631• Fiqh: majority; Permanent Committee on waqf
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विरासत में मिली ज़मीन और मकानों की ज़कात
मुझे विरासत में ज़मीन और मकान मिले हैं — कुछ ख़ाली पड़े हैं, कुछ किराए पर हैं; बेचने की बात भी कभी-कभार उठती है। ज़कात का क्या हुक्म है?
मुख़्तसर जवाब: विरासत में मिली ग़ैर-मनक़ूला जायदाद की क़ीमत पर ज़कात नहीं — यह माल-ए-तिजारत नहीं, क्योंकि न आपने उसे ख़रीदा और न तिजारत की नीयत की। ज़कात इन सूरतों में आएगी: (क) जमा हुए किराए पर (नक़दी के अहकाम); (ख) फ़सल पर उश्र; …
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Quran: Quran 4:11-12• Hadith: Bukhari 1464, 2452• Fiqh: Permanent Committee on inherited property