एसजीटी फतवा लाइब्रेरी आधुनिक परिसंपत्तियों की ज़कात पर सत्यापित इस्लामी फ़ैसले एकत्र करती है — क्रिप्टोकरेंसी, शेयर, पेंशन और जीपीएफ, रियल एस्टेट, तथा ऋण। प्रत्येक फतवा कुरान, हदीस और विद्वानों के संदर्भ देता है ताकि आप विश्वास से लागू कर सकें। हेडर भाषा स्विचर और नीचे फ़िल्टर इस्तेमाल करें, फिर कोई प्रविष्टि खोलकर पूरा फ़ैसला और प्रमाण पढ़ें।
Real Estate
क्या अपने रहने के घर पर ज़कात वाजिब है?
जिस घर में मेरा परिवार रहता है, ज़मीन समेत उसकी क़ीमत बहुत ज़्यादा है। क्या उस पर ज़कात देनी होगी?
मुख़्तसर जवाब: नहीं। जिस घर में आप रहते हैं, जो गाड़ी आप चलाते हैं, आपका घरेलू सामान — ज़ाती इस्तेमाल के माल पर ज़कात नहीं, चाहे उसकी क़ीमत कितनी ही ज़्यादा हो। ज़कात बढ़ने वाले और तिजारती माल पर वाजिब होती है: नक़दी, सोना-चाँदी, म…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1464; Muslim 982• Fiqh: Ibn Qudamah; Ibn Baz; al-Uthaymin
Pension & GPF
आजिर (नियोक्ता) के ग़ैर-मुस्तहक़ (अन-वेस्टेड) हिस्से की ज़कात
मेरा आजिर (नियोक्ता) फ़ंड में मेरी जमा रक़म के साथ अपनी तरफ़ से भी रक़म डालता है, लेकिन अगर मैं मुक़र्ररा साल नौकरी पूरी न करूँ तो उसका हिस्सा मुझे नहीं मिलता। मुझ पर …
मुख़्तसर जवाब: हिसाब तीन हिस्सों में कीजिए: (1) आपकी अपनी जमा रक़म — अगर निकालना मुमकिन हो तो हर साल ज़कात वाजिब है, वरना वुसूली के वक़्त; (2) आजिर का ग़ैर-मुस्तहक़ (मशरूत) हिस्सा — मिल्कियत में आया ही नहीं, लिहाज़ा उस पर कोई ज़कात न…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: al-Uthaymin; Permanent Committee on complete ownership
Pension & GPF
ग्रैच्युटी की रक़म पर ज़कात
मेरा एम्प्लॉयर नौकरी के इख़्तिताम पर ग्रैच्युटी अदा करता है। क्या मुझे नौकरी के दौरान इसका हिसाब करना होगा, या वसूल करने के बाद ही?
मुख़्तसर जवाब: ग्रैच्युटी हाथ में आने से पहले उस पर कोई ज़कात नहीं — नौकरी के दौरान यह आपकी मिल्कियत का माल है ही नहीं, महज़ एम्प्लॉयर के ज़िम्मे एक वादा की हुई देनदारी है, जिसकी रक़म भी अभी तय नहीं। वसूली के दिन से यह नक़द माल बन ज…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: Permanent Committee on end-of-service benefits
Pension & GPF
बैंक डीपीएस की ज़कात और सूद का हुक्म
मैं बैंक में डीपीएस (डिपॉज़िट पेंशन स्कीम) चलाता हूँ जो मुद्दत पूरी होने पर जमा रक़म के साथ 'मुनाफ़ा' देती है। ज़कात और इस मुनाफ़े का क्या हुक्म है?
मुख़्तसर जवाब: (1) आपकी जमा की हुई असल रक़म आपका माल है — हर साल उसे अपनी दूसरी नक़दी के साथ जोड़कर निसाब से बढ़ने पर 2.5% ज़कात अदा करें, क्योंकि डीपीएस तोड़कर असल रक़म वापस ली जा सकती है (चाहे जुर्माने के साथ ही सही)। (2) रिवायत…
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Quran: Quran 2:275, 2:279• Hadith: Sahih Muslim 1598• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on bank interest
Pension & GPF
माहाना पेंशन की आमदनी पर ज़कात
मुझे हर महीने पेंशन मिलती है जिसका ज़्यादातर हिस्सा घर के ख़र्च में चला जाता है। क्या इस आमदनी पर ज़कात वाजिब है?
मुख़्तसर जवाब: ज़कात आमदनी पर नहीं बल्कि बचत पर वाजिब होती है। माहाना पेंशन तनख़्वाह की तरह है: जो ख़र्च हो जाए उस पर कोई ज़कात नहीं; और जो जमा होकर आपके कुल माल को निसाब से ऊपर रखे और उस पर क़मरी साल गुज़र जाए, उस पर 2.5% ज़कात है…
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Quran: Quran 2:219• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin on salary zakat
Pension & GPF
रिटायरमेंट पर मिलने वाली एकमुश्त रक़म की ज़कात
रिटायरमेंट के वक़्त मुझे पेंशन/जीपीएफ़ के तौर पर एक बड़ी एकमुश्त रक़म मिली है। इस पर ज़कात कब से वाजिब होगी और कैसे अदा करूँ?
मुख़्तसर जवाब: जिस दिन रक़म आपके हाथ में पहुँचे, उसी दिन से हौल शुरू होता है। एक क़मरी साल गुज़रने के बाद निसाब से ऊपर जो कुछ बाक़ी रहे, उस पर 2.5% ज़कात है। जमा होने के पिछले सालों की कोई बक़ाया ज़कात वाजिब नहीं, क्योंकि उस वक़्त …
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Quran: Quran 9:34-35• Hadith: Ibn Majah 1792; Bukhari 1405; Muslim 979, 987• Fiqh: Permanent Committee
Pension & GPF
जीपीएफ़ और प्रोविडेंट फ़ंड की रक़म पर ज़कात
मेरे जीपीएफ़/प्रोविडेंट फ़ंड में रक़म जमा होती रहती है जो नौकरी ख़त्म होने से पहले नहीं निकाली जा सकती। क्या मुझे हर साल उस पर ज़कात अदा करनी होगी?
मुख़्तसर जवाब: जो हिस्सा आप अपनी मर्ज़ी से न निकाल सकते हैं न ख़र्च कर सकते हैं, उस पर क़ब्ज़े से पहले ज़कात वाजिब नहीं, क्योंकि मिल्कियत नामुकम्मल है। जब रक़म हाथ में आ जाए तो वह आपकी नक़दी में शामिल होगी और निसाब व हौल पूरा होने पर उ…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz
Debts & Loans
क़र्ज़दारों को ज़कात देना; क़र्ज़ माफ़ करने को ज़कात मानना
क्या क़र्ज़ में डूबे हुए शख़्स को ज़कात दी जा सकती है? और अगर मैं किसी पर अपना क़र्ज़ माफ़ कर दूँ, तो क्या वह मेरी ज़कात मानी जा सकती है?
मुख़्तसर जवाब: (1) जी हाँ — क़र्ज़दार (अल-ग़ारिमीन) क़ुरआन में बयान किए गए ज़कात के आठ मसारिफ़ में से एक हैं; जो शख़्स हलाल ज़रूरत के लिए मक़रूज़ हो और अदायगी से आजिज़ हो, उसे उसके क़र्ज़ की मिक़दार तक ज़कात दी जा सकती है, बल्कि सीधे उसके क़…
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Quran: Quran 9:60• Hadith: Sahih Muslim 1044• Fiqh: majority; Permanent Committee; al-Uthaymin on tamlīk
Debts & Loans
सिक्योरिटी डिपॉज़िट (ज़मानत की रक़म) और पेशगी किराए की ज़कात
घर किराए पर लेते वक़्त मैंने मकान-मालिक को सिक्योरिटी डिपॉज़िट (ज़मानत की रक़म) और कुछ महीनों का पेशगी किराया दिया। इस रक़म की ज़कात किस पर वाजिब है?
मुख़्तसर जवाब: (1) वापस मिलने वाला ज़मानती डिपॉज़िट: यह आपका माल है — मकान-मालिक के ज़िम्मे आपका क़र्ज़ (मज़बूत क़र्ज़)। अगर मालिक ख़ुशहाल हो और वापसी यक़ीनी हो तो हर साल इसे अपनी ज़कात के हिसाब में शामिल करें। (2) पेशगी किराया: अदायगी…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1454; athar of Uthman• Fiqh: Permanent Committee on refundable deposits
Debts & Loans
होम लोन की मौजूदगी में ज़कात
मैंने माहाना क़िस्तों पर लंबी मुद्दत का होम लोन लिया है। क्या मेरी बचत लोन की पूरी अदायगी तक ज़कात से मुस्तसना (माफ़) रहेगी?
मुख़्तसर जवाब: नहीं, कोई छूट नहीं। लंबी मुद्दत के क़र्ज़ के बावजूद हाथ में मौजूद निसाब के बराबर बचत पर ज़कात फ़र्ज़ रहती है — दलीलों की रू से यही राजेह मौक़िफ़ है। ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ़ जल्द वाजिब-उल-अदा क़िस्त घटाई जा सकती है; अगर 20-3…
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Quran: Quran 9:103; 2:278-279• Hadith: Sahih Muslim 1598• Fiqh: al-Uthaymin on the debtor's zakat
Debts & Loans
नाक़ाबिल-ए-वुसूल या मशकूक क़र्ज़ की ज़कात
मैंने किसी को क़र्ज़ दिया था; अब वह इनकार करता है या अदा नहीं कर सकता, और वसूली ग़ैर-यक़ीनी है। क्या मुझे उस पर ज़कात देते रहना होगा?
मुख़्तसर जवाब: नहीं। इनकार करने वाले, फ़रार या तंगदस्त क़र्ज़दार के ज़िम्मे बक़ाया रक़म "ज़ईफ़ (कमज़ोर) क़र्ज़" है — जब तक वसूली ग़ैर-यक़ीनी रहे उस पर कोई ज़कात नहीं। वसूल होने पर राजेह क़ौल के मुताबिक़ उसी दिन से नया हौल शुरू होगा; वसूली के…
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Quran: Quran 2:280, 2:286• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: Permanent Committee; al-Uthaymin on weak debts
Debts & Loans
दूसरों को क़र्ज़ दी गई रक़म की ज़कात
मैंने एक रिश्तेदार को बड़ी रक़म क़र्ज़ दी है; वह खुशहाल है, क़र्ज़ का इक़रार भी करता है और वक़्त पर अदा कर देगा। क्या मुझ पर इस रक़म की ज़कात वाजिब है?
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ। खुशहाल और इक़रार करने वाले क़र्ज़दार के ज़िम्मे आपका क़र्ज़ 'मज़बूत क़र्ज़' (दैन-ए-क़वी) है — यह आपका ही माल है, बस दूसरे के हाथ में है। हर साल अपने ज़कात के दिन उसे अपने बाक़ी माल के साथ मिलाकर 2.5% अदा करें। अगर …
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1454; athar of Uthman, Muwatta• Fiqh: Ibn Baz; Permanent Committee on strong debts