Fatwa Library

The SGT Fatwa Library brings together verified Islamic rulings on Zakat for modern assets — cryptocurrency, stocks and shares, pension and GPF funds, real estate, and debts and loans. Each fatwa cites its Quran, Hadith, and scholarly references so you can apply the ruling with confidence, and every entry is available in six languages — বাংলা, English, العربية, اردو, Bahasa Indonesia and हिन्दी. Use the language buttons above and the filters below, then open any entry to read the full ruling and the evidence behind it.

Real Estate

माल की क़ीमत महफ़ूज़ रखने के लिए ख़रीदे गए प्लॉट

बैंक में रखा पैसा ख़र्च हो जाता है, इसलिए मैं उसे प्लॉटों में लगा देता हूँ — बेचने की कोई जल्दी नहीं; ज़रूरत पड़ने पर या दाम बढ़ने पर शायद बेच दूँ। क्या इस पर हर साल ज़…

मुख़्तसर जवाब: पक्की और साफ़ तिजारती नीयत के बग़ैर (यानी प्लॉट ख़रीदा ही मुनाफ़े पर दोबारा बेचने के लिए हो) प्लॉट पर सालाना ज़कात नहीं — 'ज़रूरत पड़ी तो शायद बेच दूँ' जैसे लटके हुए ख़याल उसे माल-ए-तिजारत नहीं बनाते। जब आप वाक़ई बेच द…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1, 1450, 1464• Fiqh: al-Uthaymin on land held as store of value
Real Estate

घर बनाने के लिए जमा की गई रक़म की ज़कात

मैं कई सालों से अपने प्लॉट पर घर बनाने के लिए पैसे जमा कर रहा हूँ, और कुछ सरिया और ईंटें भी ख़रीद रखी हैं। क्या इन पर ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: (1) जमा की गई रक़म: हाँ — जब तक वह हाथ में या बैंक में मौजूद है और निसाब व हौल पूरा करती है, उस पर ज़कात फ़र्ज़ है; 'यह मेरे घर के लिए है' की नीयत कोई छूट नहीं देती। (2) अपने ज़ाती घर के लिए ख़रीदा गया तामीरी सामा…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 1792; Muslim 2588• Fiqh: Ibn Baz; Permanent Committee
Real Estate

दुकान की सलामी (पगड़ी) और पज़ेशन मनी की ज़कात

मैंने मार्केट में दुकान लेने के लिए मालिक को भारी ना-वापसी सलामी दी है; यह पज़ेशन (क़ब्ज़ा) बाद में आगे बेचा भी जा सकता है। इसकी ज़कात का क्या हुक्म और हिसाब है?

मुख़्तसर जवाब: (1) किरायेदार (आपकी) तरफ़ से: सलामी अदा करते ही वह रक़म आपकी मिल्कियत नहीं रही — यह एक ख़र्च है; उस पर कोई ज़कात नहीं। अगर आप ख़ुद अपनी तिजारत के लिए दुकान चलाते हैं तो पज़ेशन का हक़ इस्तेमाली माल है — उस पर ज़कात नही…
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Quran: Quran 2:282• Hadith: Bukhari 1, 1464• Fiqh: Permanent Committee on leases and trade goods
Pension & GPF

साल पूरा होने से पहले माल हटाकर ज़कात से बचने का हुक्म

कुछ लोग हौल पूरा होने से ऐन पहले ज़कात से बचने के लिए पैसा रिश्तेदारों के पास भेज देते हैं या फ़र्ज़ी ख़र्चे दिखाते हैं, फिर बाद में वापस ले लेते हैं। इसका क्या हुक्म ह…

मुख़्तसर जवाब: ज़कात से बचने के हीले — हौल पूरा होने से पहले माल की आरिज़ी मुंतक़ली, जाली ख़र्चे, सोचे-समझे बँटवारे — हराम हैं; बल्कि राजेह क़ौल के मुताबिक़ इनसे फ़र्ज़ साक़ित भी नहीं होता: बचने की नीयत से की गई मुंतक़ली अल्लाह के सामन…
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Quran: Quran 68:17-33• Hadith: Bukhari 1450, 1• Fiqh: al-Uthaymin on evasive devices
Pension & GPF

बीवी या औलाद के नाम रखी गई बचत — ज़कात कौन अदा करे?

टैक्स और सहूलियत की ख़ातिर कुछ एफ़डीआर मैंने बीवी के नाम रखे हैं, हालाँकि रक़म असल में मेरी है; बीवी के अपने ज़ेवर और बचत भी हैं। किस चीज़ की ज़कात कौन अदा करेगा?

मुख़्तसर जवाब: मेयार असली मिल्कियत है, काग़ज़ पर लिखा नाम नहीं। (1) जो रक़म बीवी के नाम रखी गई है मगर अमलन आपकी है — वह आपका माल है: उसकी ज़कात आपके हिसाब में अदा होगी। (2) जो कुछ आपने वाक़ई उसे हिबा कर दिया — वह उसका माल है: उ…
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Quran: Quran 4:32• Hadith: Abu Dawud 1563; Bukhari 1450• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin on real ownership
Pension & GPF

मरहूम की पेंशन/जीपीएफ़ और वारिसों की ज़कात

वालिद साहब के इंतिक़ाल के बाद हम वारिसों को उनकी पेंशन/जीपीएफ़ की रक़म मिली है। उनकी अदा न की गई ज़कात और हमारे अपने हिस्सों की ज़कात का हिसाब कैसे होगा?

मुख़्तसर जवाब: मरहलावार: (1) मरहूम के ज़िम्मे जो ज़कात या क़र्ज़ बाक़ी हो वह तक़सीम से पहले पूरे तरके से अदा किया जाएगा — अल्लाह का क़र्ज़ अदायगी का सबसे ज़्यादा हक़दार है; (2) फिर वसीयत (एक-तिहाई के अंदर, ग़ैर-वारिस के लिए); (3) बाक़ी मा…
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Quran: Quran 4:11-12• Hadith: Bukhari 1953; Ibn Majah 1792• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin on estate zakat
Pension & GPF

क्या बुढ़ापे या बीमारी की वजह से ज़कात माफ़ हो जाती है?

मेरे बूढ़े वालिद अब कमाने के क़ाबिल नहीं रहे, लेकिन उनके नाम एफ़डीआर और ज़मीन है। क्या उम्र या बीमारी की वजह से उनकी ज़कात माफ़ है?

मुख़्तसर जवाब: नहीं। ज़कात माल पर फ़र्ज़ है, आदमी की कमाने की सलाहियत पर नहीं — मालिक चाहे बूढ़ा हो, बीमार हो, यहाँ तक कि नाबालिग़ या ग़ैर-आक़िल ही क्यों न हो, जब माल निसाब और हौल मुकम्मल कर ले तो उस पर ज़कात वाजिब है। मजबूरी और माज़…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1395; athar of Umar• Fiqh: majority: zakat attaches to wealth
Pension & GPF

शादी या इलाज के लिए रखी गई रक़म पर ज़कात

मैंने अपनी बेटी की शादी और अपने इलाज के लिए अलग-अलग रक़म रखी हुई है — यह तो 'ज़रूरत' का पैसा है। क्या इस पर भी ज़कात वाजिब होगी?

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ। मुस्तक़बिल की ज़रूरतों के लिए अलग रखी हुई रक़म भी आप ही की मिल्कियत की नक़दी है — निसाब और हौल मुकम्मल होते ही उस पर ज़कात फ़र्ज़ है। शरीअत की रिआयत सिर्फ़ इस्तेमाल में आने वाली चीज़ों (रिहाइशी मकान, लिबास, बर्तन) …
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Quran: Quran 2:219; 9:34-35• Hadith: Sahih al-Bukhari 1403• Fiqh: al-Uthaymin on earmarked savings
Pension & GPF

हज के लिए जमा किए गए पैसों की ज़कात

मैं कई सालों से हज की नीयत से पैसे जमा कर रहा हूँ। क्या इबादत के लिए रखी गई रक़म पर भी ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ। मक़सद चाहे कितना ही अज़ीम हो — हज हो, क़ुरबानी हो, औलाद की शादी हो या घर की तामीर — जब तक रक़म आपकी मिल्कियत में है और निसाब व हौल पूरा करती है, उस पर ज़कात फ़र्ज़ रहती है। नीयत माल को हिसाब से बाहर नहीं करत…
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Quran: Quran 9:103; 34:39• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: Ibn Baz; Permanent Committee on earmarked savings
Pension & GPF

फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FDR) की ज़कात और सूद का हुक्म

मेरी रिटायरमेंट की रक़म बैंक के फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FDR) में रखी है। क्या हर साल पूरी FDR की ज़कात अदा करूँ? और 'मुनाफ़े' का क्या हुक्म है?

मुख़्तसर जवाब: (1) जी हाँ — FDR की असल रक़म आपका माल है; उसे मियाद से पहले भी (जुर्माना देकर) तुड़वाया जा सकता है, इसलिए मिल्कियत और इख़्तियार मुकम्मल हैं — हर साल उसे अपनी बाक़ी नक़दी के साथ मिलाकर 2.5% ज़कात अदा करें। (2) रिवायती…
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Quran: Quran 2:275; 9:34-35• Hadith: Muslim 1598, 987• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz
Pension & GPF

यूनिवर्सल पेंशन स्कीम: चंदा और ज़कात

मैं सरकार की यूनिवर्सल पेंशन स्कीम में हर महीने चंदा जमा कर रहा हूँ — साठ साल की उम्र से पहले रक़म नहीं निकाली जा सकती, और मुनाफ़े की दर पहले से एलान-शुदा है। इसका …

मुख़्तसर जवाब: (1) ज़कात: जमा किया हुआ चंदा साठ साल की उम्र तक आपके इख़्तियार से बाहर रहता है — मिल्कियत नामुकम्मल है; इसलिए जीपीएफ़ (GPF) के उसूल पर पेंशन या एकमुश्त रक़म हाथ में आने से पहले ज़कात वाजिब नहीं; मिलने के बाद नक़दी के …
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Quran: Quran 2:275, 2:279• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: Permanent Committee on provident funds
Debts & Loans

करेंसी की क़ीमत गिरने के बाद क़र्ज़ की अदायगी

पाँच साल पहले मैंने एक लाख टका क़र्ज़ दिया था — अब उसकी क़ुव्वत-ए-ख़रीद बहुत घट चुकी है। क्या मैं महँगाई (मुद्रास्फीति) का मुआवज़ा तलब कर सकता हूँ? और इस पावने की ज़कात क…

मुख़्तसर जवाब: (1) क़र्ज़ की वापसी मिस्ल-ब-मिस्ल होती है (मिस्लन बि-मिस्ल) — आपने एक लाख दिया तो एक लाख ही आपका हक़ है; महँगाई के मुआवज़े की शर्त लगाना या उसका मुतालबा करना क़र्ज़ पर बढ़ोतरी है — यानी सूद। यही जमहूर उलमा और फ़िक़्ह अकादमी…
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Quran: Quran 2:279• Hadith: Bukhari 2393; Muslim 1587• Fiqh: Islamic Fiqh Academy Jeddah; Permanent Committee
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