The SGT Fatwa Library brings together verified Islamic rulings on Zakat for modern assets — cryptocurrency,
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Hadith, and scholarly references so you can apply the ruling with confidence, and every entry is available
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Livestock & Agriculture
रिकाज़ (गड़ा ख़ज़ाना) और खनिज पर ज़कात
अगर मुझे ज़मीन में दफ़्न जाहिलियत के ज़माने का ख़ज़ाना मिले या मैं ज़मीन से खनिज निकालूँ, तो कितनी ज़कात वाजिब होगी?
मुख़्तसर जवाब: दोनों सूरतें अलग हैं। (1) रिकाज़ — यानी ज़मीन में दफ़्न ज़माना-ए-जाहिलियत का ख़ज़ाना — इसमें पाँचवाँ हिस्सा (20%, ख़ुमुस) वाजिब है, मिलते ही फ़ौरन अदा करना होगा, न कोई निसाब है और न साल गुज़रने का इंतिज़ार। (2) मादिन —…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1499• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz — ma'din vs rikaz
Recipients (8 Categories)
ज़कात को दूसरे शहर या देश में भेजना
क्या मैं अपनी ज़कात मक़ामी तौर पर देने के बजाय किसी दूसरे शहर या देश में ग़रीब रिश्तेदारों या नेक कामों के लिए भेज सकता हूँ?
मुख़्तसर जवाब: असल हुक्म यह है कि ज़कात उसी इलाक़े के फ़ुक़रा (ग़रीबों) में तक़सीम की जाए जहाँ माल मौजूद है, जैसा कि नबी ﷺ ने मुआज़ रज़ियल्लाहु अन्हु को (यमन भेजते वक़्त) हुक्म दिया (सहीह बुख़ारी 1496, 1458, 1395)। लेकिन किसी जायज़ ज़रूरत…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1496; Sahih al-Bukhari 1458; Sahih al-Bukhari 1395• Fiqh: Permanent Committee for Scholarly Research and Ifta; based on Sahih al-Bukhari 1496, 1458, 1395; Sahih Muslim 983 (indirectly).
Recipients (8 Categories)
भाई-बहनों और दूसरे रिश्तेदारों को ज़कात देना
क्या मैं अपने ज़रूरतमंद भाई, बहन, चचा, फूफी, भतीजे या ससुराल वालों को ज़कात दे सकता हूँ?
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ, आप अपने ज़रूरतमंद भाइयों, बहनों, चचाओं, फूफियों, भतीजों और ससुराल वालों को ज़कात दे सकते हैं, बशर्ते वे उन लोगों में से न हों जिनका नान-नफ़का आप पर शरई तौर पर वाजिब है (जैसे माँ-बाप या औलाद)। ऐसा करना न…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1466; Sahih al-Bukhari 1428; Sahih al-Bukhari 1461• Fiqh: Permanent Committee for Scholarly Research and Ifta (Fatawa al-Lajnah al-Da'imah); Shaykh Muhammad ibn Salih al-Uthaymin; Ibn Baz; based on Sahih al-Bukhari 1461, 1466, 1428.
Recipients (8 Categories)
अस्पताल, कुँओं और आपदा राहत के लिए ज़कात
क्या ज़कात से अस्पताल बनाना, कुआँ खोदना, या बाढ़ और आपदा राहत में देना जायज़ है?
संक्षिप्त उत्तर: नहीं, सीधे तौर पर अस्पताल बनाने, कुआँ खोदने या आम आपदा राहत परियोजनाओं में ज़कात देना जायज़ नहीं है, क्योंकि ज़कात को सूरह अत-तौबा 9:60 में बताए गए आठ मदों तक सीमित रखना ज़रूरी है और किसी फ़र्द मुस्तहिक़ को मालिक बन…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:60• Fiqh: Permanent Committee (al-Lajnah al-Da'imah); Ibn Baz; al-Uthaymin
Recipients (8 Categories)
पूरी ज़कात एक ही व्यक्ति को देना
क्या मुझे अपनी ज़कात आठों मदों में बाँटनी ज़रूरी है, या मैं पूरी ज़कात किसी एक ज़रूरतमंद व्यक्ति को दे सकता हूँ?
संक्षिप्त उत्तर: सूरह अत-तौबा (9:60) में बताई गई आठ मदों में से किसी एक हक़दार व्यक्ति को अपनी पूरी ज़कात देना जायज़ है। आप पर इसे आठों मदों में बाँटना ज़रूरी नहीं।
तफ़सील: आयत (9:60) ज़कात के हक़दारों की मदें बयान करती है, लेकिन …
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Quran: Surah At-Tawbah 9:60• Hadith: Sahih Muslim 1044• Fiqh: Permanent Committee for Islamic Research and Ifta (al-Lajnah al-Da'imah); majority of scholars (jumhur)
Recipients (8 Categories)
ज़कात में "फ़ी सबीलिल्लाह" का मतलब
"अल्लाह की राह में" से क्या मुराद है — सिर्फ़ हथियारबंद जिहाद, या दावत, तालिब-ए-इल्म और फ़लाही काम भी?
मुख़्तसर जवाब: क़ुरआन-ए-करीम के वाज़ेह दलाइल और सलफ़-ए-सालिहीन की समझ के मुताबिक़, ज़कात के मसारिफ़ के सिलसिले में "फ़ी सबीलिल्लाह" (अल्लाह की राह में) से ख़ास तौर पर अल्लाह की राह में हथियारबंद जिहाद और उसकी तैयारी मुराद है (सूरह अ…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:60• Fiqh: Ibn Baz; Permanent Committee for Scholarly Research and Ifta
Livestock & Agriculture
ज़कात में चरने वाले (साइमा) और चारा खिलाए गए (मालूफ़ा) जानवर
ज़कात के लिहाज़ से आज़ाद चरने वाले और बाँधकर चारा खिलाए जाने वाले जानवरों में क्या फ़र्क़ है, और हर एक पर कौन से अहकाम लागू होते हैं?
मुख़्तसर जवाब: आज़ाद चरने वाले (साइमा) जानवरों पर मवेशियों की मुक़र्रर ज़कात के जदवल (निसाब और दरें) लागू होते हैं, जैसा कि अबू बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु के ख़त की सहीह हदीस में मज़कूर है (सहीह बुख़ारी 1454-55)। बाँधकर चारा खिलाए जाने …
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1455• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz; al-Uthaymin; based on Sahih al-Bukhari hadith
Livestock & Agriculture
साझा मिल्कियत वाले रेवड़ की ज़कात (ख़ुल्तह)
हम कई लोग अपने जानवरों को एक साथ एक ही रेवड़ में चराते हैं — मिले-जुले रेवड़ की ज़कात कैसे तय की जाएगी?
मुख़्तसर जवाब: जिस रेवड़ को कई मालिक मिलकर चराते हैं (ख़ुल्तह), उसकी ज़कात तमाम जानवरों के कुल जोड़ पर इस तरह लगाई जाएगी जैसे वह एक ही रेवड़ हो। यह इस उसूल पर आधारित है कि अलग-अलग लोगों के माल को बनावटी तौर पर एक साथ न मिलाया ज…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1450• Fiqh: Sahih al-Bukhari; Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
Gold, Silver & Jewelry
सोने और चाँदी के बर्तन रखना: हुक्म और ज़कात
क्या सोने या चाँदी की प्लेटें और चम्मच वग़ैरा रखना जायज़ है, और क्या इन पर ज़कात वाजिब होती है?
मुख़्तसर जवाब: सोने और चाँदी के बर्तनों में खाना-पीना हराम है, और इसी मक़सद के लिए इन्हें रखना भी हराम है। अगर कोई इन्हें रखे तो निसाब को पहुँचने और पूरे एक क़मरी साल मिल्कियत में रहने की सूरत में इन पर ज़कात वाजिब होगी।
तफ़्सील:…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih Muslim 2067; Sahih al-Bukhari 1447; Sahih Muslim 987a• Fiqh: Derived from Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim; position of Ahl al-Hadith scholars.
Business & Trade
कारोबारी वाजिब-उल-वसूल और वाजिब-उल-अदा रक़में और ज़कात
गाहकों की तरफ़ मेरी वाजिब-उल-वसूल रक़में और सप्लायर्स के वे बिल जो मुझ पर वाजिब-उल-अदा हैं, मेरी कारोबारी ज़कात पर कैसे असर डालते हैं?
मुख़्तसर जवाब: गाहकों की वे रक़में जो वसूल के क़ाबिल हों (किसी मालदार, इक़रार करने वाले क़र्ज़दार की तरफ़) 'मज़बूत क़र्ज़' शुमार होती हैं और ज़कात के हिसाब के वक़्त इन्हें हर साल अपनी नक़दी और माल-ए-तिजारत में शामिल करना ज़रूरी है। मशकूक …
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Quran: Surah Al-Baqarah 2:267• Fiqh: Ibn Uthaymin; Permanent Committee
Business & Trade
मुर्दा, ख़राब या न बिके स्टॉक की ज़कात
मेरा कुछ माल ख़राब हो चुका है या बरसों से नहीं बिका — क्या मुझे फिर भी उस पर ज़कात देनी होगी? और किस क़ीमत पर?
संक्षिप्त जवाब: तिजारत के माल (व्यापारिक स्टॉक) पर ज़कात उसकी मौजूदा मुनासिब बिक्री क़ीमत के हिसाब से वाजिब है, जो ज़कात की सालाना तारीख़ पर लगती है। जो माल बिलकुल न बिकने लायक़, ख़राब या मियाद ख़त्म हो चुका हो और जिसकी कोई बाज़ार क़ी…
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Quran: Surah Al-Baqarah 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1450• Fiqh: Ibn Uthaymin; based on general zakat principles from Qur'an and Sunnah
Livestock & Agriculture
फलों के बाग़, खजूर और किशमिश पर उश्र
फलदार पेड़ों, खजूर और अंगूर/किशमिश पर उश्र किस तरह और कब वाजिब होता है?
मुख़्तसर जवाब: उश्र (खेती की पैदावार की ज़कात) खजूर और अंगूर (और दूसरी फलों की फ़सलों) पर सिंचाई के तरीक़े के आधार पर वाजिब होता है। जो ज़मीन बारिश, क़ुदरती चश्मों या दरियाओं के पानी से सींची जाए उस पर दर दसवाँ हिस्सा (10%) है, औ…
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Quran: Surah Al-Baqarah 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1483• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee (based on Sahih al-Bukhari 1483)