Question
"अल्लाह की राह में" से क्या मुराद है — सिर्फ़ हथियारबंद जिहाद, या दावत, तालिब-ए-इल्म और फ़लाही काम भी?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: क़ुरआन-ए-करीम के वाज़ेह दलाइल और सलफ़-ए-सालिहीन की समझ के मुताबिक़, ज़कात के मसारिफ़ के सिलसिले में "फ़ी सबीलिल्लाह" (अल्लाह की राह में) से ख़ास तौर पर अल्लाह की राह में हथियारबंद जिहाद और उसकी तैयारी मुराद है (सूरह अत-तौबा 9:60)। इसमें मुजाहिदीन और सरहदों की हिफ़ाज़त करने वालों के लिए हथियार, साज़-ओ-सामान और मदद फ़राहम करना शामिल है। इसमें मस्जिदों, सड़कों और पुलों की तामीर, दावती सरगर्मियाँ, तालिब-ए-इल्म के वज़ाइफ़ या आम फ़लाही मंसूबे शामिल नहीं। कुछ बाद के उलमा ने इस मतलब को तमाम नेक कामों तक वसीअ कर दिया है, लेकिन क़ुरआन के बुनियादी इस्तेमाल (जहाँ इसकी तफ़्सीर "मुजाहिदीन के लिए" की गई है) और सलफ़ के इज्माअ की बुनियाद पर दलील के ऐतबार से राजेह क़ौल यही है कि यह जिहाद तक महदूद है।
दलाइल:
1. सूरह अत-तौबा 9:60 में "फ़ी सबीलिल्लाह" को ज़कात के मुस्तहिक़ीन की आठ क़िस्मों में से एक के तौर पर ज़िक्र किया गया है। कलासिकी तफ़्सीर इस बात की तस्दीक़ करती है कि इसका मतलब "अल्लाह की राह में लड़ने वाले" (मुजाहिदीन) हैं।
2. मुस्तक़िल कमेटी बराए इल्मी तहक़ीक़ व इफ़्ता (सऊदी अरब) और शैख़ इब्न बाज़ फ़रमाते हैं: "आयत में (फ़ी सबीलिल्लाह) का बुनियादी मतलब अल्लाह की राह में जिहाद और उसकी तैयारी है... मस्जिदों, सड़कों, पुलों की तामीर या आम फ़लाही मसालेह इसमें शामिल नहीं।"
लिहाज़ा, "फ़ी सबीलिल्लाह" के मसरफ़ के लिए मख़्सूस ज़कात की रक़म बराह-ए-रास्त उन लोगों को दी जानी चाहिए जो इस्लाम के दिफ़ाअ में जिस्मानी जिहाद में मसरूफ़ हैं या उसकी तैयारी कर रहे हैं। दीगर फ़लाही ज़रूरियात के लिए ज़कात की दूसरी क़िस्में जैसे "फ़ुक़रा" या "मसाकीन" इस्तेमाल की जा सकती हैं।
तंबीह: यह फ़राहम कर्दा दलाइल की बुनियाद पर एक ख़ुलासा है। पेचीदा मसाइल के लिए किसी मुस्तनद आलिम से रुजूअ करें।
References
Quran
Surah At-Tawbah 9:60
Fiqh
Ibn Baz; Permanent Committee for Scholarly Research and Ifta