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Gold, Silver & Jewelry Jul 13, 2026

सोने और चाँदी के बर्तन रखना: हुक्म और ज़कात

Question

क्या सोने या चाँदी की प्लेटें और चम्मच वग़ैरा रखना जायज़ है, और क्या इन पर ज़कात वाजिब होती है?

Ruling (Fatwa)

मुख़्तसर जवाब: सोने और चाँदी के बर्तनों में खाना-पीना हराम है, और इसी मक़सद के लिए इन्हें रखना भी हराम है। अगर कोई इन्हें रखे तो निसाब को पहुँचने और पूरे एक क़मरी साल मिल्कियत में रहने की सूरत में इन पर ज़कात वाजिब होगी। तफ़्सील: 1. इस्तेमाल की मुमानअत: नबी ﷺ ने साफ़ तौर पर सोने और चाँदी के बर्तनों में पीने और उनकी प्लेटों में खाने से मना फ़रमाया है (सहीह मुस्लिम 2067)। यह मुमानअत मर्दों और औरतों दोनों के लिए है। ऐसे बर्तनों को इस्तेमाल के मक़सद से रखना भी इसी मुमानअत में दाख़िल है, क्योंकि बर्तन इस्तेमाल ही के लिए बनाए जाते हैं। लिहाज़ा खाने-पीने के लिए सोने या चाँदी की प्लेटें, चम्मच या इस जैसा कोई बर्तन रखना जायज़ नहीं। 2. ज़कात की फ़र्ज़ियत: सोना और चाँदी चाहे किसी भी शक्ल में हों, अगर निसाब को पहुँच जाएँ तो ज़कात वाजिब होने वाला माल हैं। चाँदी का निसाब पाँच औक़िया है (तक़रीबन 595 ग्राम या 200 दिरहम), जैसा कि सहीह बुख़ारी (1447, 1405, 1459) में आया है। सोने का निसाब बीस मिस्क़ाल है (तक़रीबन 85 ग्राम), जो दीगर सहीह अहादीस से साबित है (यहाँ पेश किए गए दलाइल में सीधे तौर पर नहीं, लेकिन मुत्तफ़िक़ अलैह है)। क़ुरआन (अत-तौबा 9:34-35) और हदीस (सहीह मुस्लिम 987a) में उन लोगों के लिए सख़्त अज़ाब की वईद आई है जो सोना-चाँदी जमा करते हैं और उसकी ज़कात अदा नहीं करते। चुनांचे अगर कोई सोने या चाँदी के बर्तन रखे जो निसाब को पहुँचें और पूरा साल मिल्कियत में रहें तो उनकी बाज़ारी क़ीमत पर ज़कात अदा करना वाजिब है। इनका इस्तेमाल हराम होना ज़कात को साक़ित नहीं करता, क्योंकि वुजूब माल ही से मुतअल्लिक़ है। दलाइल: 1. सहीह मुस्लिम 2067 – सोने-चाँदी के बर्तनों में पीने और खाने की मुमानअत। 2. सहीह बुख़ारी 1447 – पाँच औक़िया से कम चाँदी पर ज़कात नहीं; चाँदी के निसाब का बयान। 3. सहीह मुस्लिम 987a – सोने-चाँदी की ज़कात अदा न करने पर अज़ाब की वईद। 4. सूरह अत-तौबा 9:34-35 – ज़कात अदा किए बग़ैर सोना-चाँदी जमा करने की मज़म्मत। नोट: यह पेश किए गए दलाइल की बुनियाद पर एक सादा हुक्म है। पेचीदा मसाइल में (मसलन बर्तन सरमायाकारी या सजावट के लिए रखे गए हों) किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।

References

Quran Surah At-Tawbah 9:34-35
Hadith Sahih Muslim 2067; Sahih al-Bukhari 1447; Sahih Muslim 987a
Fiqh Derived from Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim; position of Ahl al-Hadith scholars.