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Livestock & Agriculture Jul 13, 2026

साझा मिल्कियत वाले रेवड़ की ज़कात (ख़ुल्तह)

Question

हम कई लोग अपने जानवरों को एक साथ एक ही रेवड़ में चराते हैं — मिले-जुले रेवड़ की ज़कात कैसे तय की जाएगी?

Ruling (Fatwa)

मुख़्तसर जवाब: जिस रेवड़ को कई मालिक मिलकर चराते हैं (ख़ुल्तह), उसकी ज़कात तमाम जानवरों के कुल जोड़ पर इस तरह लगाई जाएगी जैसे वह एक ही रेवड़ हो। यह इस उसूल पर आधारित है कि अलग-अलग लोगों के माल को बनावटी तौर पर एक साथ न मिलाया जाए और न ही साझा माल को सही ज़कात से बचने के लिए बाँटा जाए। हर मालिक अपने हिस्से के मुताबिक़ ज़कात अदा करेगा, लेकिन निसाब (कम से कम हद) पूरे रेवड़ के एतबार से तय होगा। तफ़्सील: सहीह बुख़ारी 1450 की हदीस में साफ़ तौर पर कहा गया है: 'न अलग-अलग लोगों के माल को एक साथ मिलाया जाए और न साझा माल को ज़कात (ज़्यादा देने या कम लेने) के डर से अलग किया जाए।' इसका मतलब यह है कि जब जानवर किसी हक़ीक़ी शराकत (ख़ुल्तह) में मिले हों, तो ज़कात पूरे रेवड़ पर गिनी जाएगी, हर मालिक के हिस्से पर अलग-अलग नहीं। मिसाल के तौर पर, अगर दो लोगों में से हर एक के पास 30 बकरियाँ हों (जो निसाब 40 से कम हैं), लेकिन दोनों के पास मिलकर 60 बकरियाँ हों, तो मिले-जुले रेवड़ पर ज़कात वाजिब हो जाएगी। फिर हर मालिक अपने हिस्से के अनुपात से ज़कात का ज़िम्मेदार होगा (मसलन हर एक आधी ज़कात)। इसके बरअक्स, अगर एक शख़्स के पास 100 बकरियाँ और दूसरे के पास 20 हों, तो वे ज़कात की दर कम करने के लिए उन्हें एक साथ नहीं मिला सकते। यही उसूल ऊँट, गाय और बकरियों पर लागू होता है। दलाइल: 1. सहीह बुख़ारी 1450 – नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ज़कात की ज़िम्मेदारी में हेरफेर करने के लिए अलग माल को एक साथ मिलाने और साझा माल को बाँटने दोनों से मना फ़रमाया। 2. सहीह बुख़ारी 1454 और 1453 में मवेशियों की ज़कात की तफ़सीली दरें बयान हुई हैं, जो इस बात की तस्दीक़ करती हैं कि ज़कात का अंदाज़ा मिल्कियत में मौजूद जानवरों की कुल तादाद के एतबार से लगाया जाता है, चाहे वह इन्फ़िरादी हो या साझा। तंबीह: अगर रेवड़ वाक़ई मिला-जुला हो (साझा चरागाह, पानी पिलाने और दूध दुहने की जगह वग़ैरह), तो ज़कात के लिए उसे एक ही इकाई गिना जाएगा। लेकिन अगर मिलावट सिर्फ़ आरज़ी हो या हक़ीक़ी शराकत न हो, तो हर मालिक के जानवरों का अंदाज़ा अलग-अलग लगाया जाएगा। मुख़्तलिफ़ क़िस्मों या जुज़वी मिल्कियत से जुड़े पेचीदा मसाइल के लिए किसी आलिम से रुजू करें।

References

Hadith Sahih al-Bukhari 1450
Fiqh Sahih al-Bukhari; Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee