Question
फलदार पेड़ों, खजूर और अंगूर/किशमिश पर उश्र किस तरह और कब वाजिब होता है?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: उश्र (खेती की पैदावार की ज़कात) खजूर और अंगूर (और दूसरी फलों की फ़सलों) पर सिंचाई के तरीक़े के आधार पर वाजिब होता है। जो ज़मीन बारिश, क़ुदरती चश्मों या दरियाओं के पानी से सींची जाए उस पर दर दसवाँ हिस्सा (10%) है, और जो ज़मीन हाथ के ज़रीए (मसलन कुएँ या पंप) से सींची जाए उस पर दर बीसवाँ हिस्सा (5%) है। यह फ़सल काटने के वक़्त वाजिब होता है।
दलाइल:
1. सहीह बुख़ारी 1483: नबी ﷺ ने फ़रमाया, 'जो ज़मीन बारिश के पानी या क़ुदरती नालों से सींची जाए या क़रीबी नाले की वजह से तर हो, उस पर उश्र (यानी दसवाँ हिस्सा) वाजिब है; और जो ज़मीन कुएँ से सींची जाए, उस पर निस्फ़ उश्र (यानी बीसवाँ हिस्सा) वाजिब है।' यह आम हुक्म तमाम खेती की पैदावार को शामिल है, जिसमें खजूर और अंगूर भी हैं।
2. सूरह अल-बक़रह 2:267: 'ऐ ईमान वालो! जो पाकीज़ा माल तुमने कमाया है और जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा किया है उसमें से ख़र्च करो।' इसमें खजूर और अंगूर भी ज़मीन की पैदावार के तौर पर शामिल हैं।
नोट: पेश किए गए नुसूस में कोई ऐसी ख़ास हदीस नहीं थी जो खजूर या अंगूर को ख़ास तौर पर उश्र का मौज़ू क़रार दे, लेकिन सिंचाई की हदीस से हासिल होने वाला आम उसूल लागू होता है। सदक़ा-ए-फ़ित्र से मुताल्लिक़ नुसूस जिनमें खजूर और किशमिश का ज़िक्र है वो अलग हैं और उश्र के लिए नहीं हैं।
पेचीदा मसाइल में किसी साहिब-ए-इल्म आलिम से रुजूअ करें।
References
Quran
Surah Al-Baqarah 2:267
Hadith
Sahih al-Bukhari 1483
Fiqh
Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee (based on Sahih al-Bukhari 1483)