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Stocks & Shares
Jul 13, 2026
क्या ज़कात हिस्सेदारी (शेयर) के रूप में अदा की जा सकती है?
Question
नक़दी की तंगी है मगर मेरे पास शेयर मौजूद हैं। क्या मैं बराबर क़ीमत के शेयर मुंतक़िल (ट्रांसफ़र) करके ज़कात अदा कर सकता हूँ?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: जायज़ है बशर्ते कि पूरी क़ीमत मुस्तहिक़ तक पहुँचे और वाक़ई उसके काम आए — नक़दी और माले-तिजारत की ज़कात में असल एतबार बराबर क़ीमत की अदायगी का है। शर्तें: (1) मुस्तहिक़ शेयर वसूल करने और बेचने की इस्तिताअत रखता हो और राज़ी हो; (2) मुंतक़िली के दिन की बाज़ारी क़ीमत पूरी वाजिब रक़म को पूरा करे; (3) ख़ुद शेयर हलाल (शरई स्क्रीनिंग शुदा) हो। अमलन अकसर ग़रीब मुस्तहिक़ीन का ब्रोकरेज अकाउंट ही नहीं होता — ऐसे में कुछ शेयर बेचकर नक़द अदा कर देना वाजिब की आसान और महफ़ूज़ अदायगी है।
तफ़सील: ज़कात मुस्तहिक़ का हक़ है — उसे ऐसी सूरत में पहुँचनी चाहिए जिसे वह बरत सके; देना हक़ीक़ी नफ़ाबख़्श मुंतक़िली हो ('ऊपर वाला हाथ नीचे वाले हाथ से बेहतर है')। कमज़ोर और कम बिकने वाले शेयर ग़रीबों के सर थोप देने से ज़िम्मा फ़ारिग़ नहीं होता — बल्कि इससे क़ीमत गिरने का ख़तरा उन्हीं पर डाल दिया जाता है। अगर कोई ख़ैराती इदारा शेयर वसूल करके उन्हें नक़द में बदलने की इस्तिताअत रखता हो तो उसके ज़रिए देना बेहतर मुतबादिल (विकल्प) है।
दलाइल: क़ुरआन 9:103; सहीह बुख़ारी 1395 (मुआज़ रज़ि०); सहीह बुख़ारी 1428 (ऊपर वाला हाथ); लजना दाइमा और शैख़ उसैमीन के नज़दीक क़ीमत की अदायगी का उसूल।
पेचीदा इन्फ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजूअ करें।
References
Quran
Quran 9:103
Hadith
Bukhari 1395, 1428
Fiqh
Permanent Committee; al-Uthaymin on paying by value