Question
कंपनी ने मुझे बोनस शेयर दिए हैं, और मैंने राइट्स इशू में दरख़्वास्त देकर रक़म भी जमा की है। इन दोनों की ज़कात कैसे शुमार करूँ?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: (1) बोनस शेयर असल होल्डिंग के ताबे हैं — अलग से कुछ नहीं करना; अगर ट्रेडिंग पोर्टफोलियो में हों तो अपने ज़कात के दिन कुल मार्केट वैल्यू (बोनस समेत) का 2.5% अदा करें; अगर लंबी मुद्दत की होल्डिंग हो तो लंबी मुद्दत का तरीक़ा इख़्तियार करें। (2) राइट्स इशू में जमा की गई रक़म अलॉटमेंट होने तक आपका वाजिबुल-वसूल क़र्ज़ है (जैसे IPO की रक़म) — इसे अपने ज़कात के दिन शामिल करें; अलॉट हो जाने पर नए शेयर असल होल्डिंग के हुक्म में शामिल हो जाएँगे। (3) अगर आप कोई क़ाबिल-ए-इंतिक़ाल राइट्स हक़ फ़रोख़्त करें तो उसकी रक़म नक़दी के अहकाम के ताबे होगी।
तफ़्सील: बोनस शेयर से कोई नई आमदनी नहीं होती — कंपनी के ज़ख़ीरे ज़्यादा शेयरों पर तक़सीम हो जाते हैं; असल पैमाना कुल मार्केट वैल्यू है, जो ट्रेडिंग के हिसाब में पहले ही शामिल होता है। नफ़ा और नुमू सरमाए के हौल के ताबे हैं — बोनस या राइट्स के लिए कोई नया हौल शुमार नहीं होगा।
दलाइल: क़ुरआन 2:267; सहीह बुख़ारी 1454; और अल-लजना अद-दाइमा व शैख़ इब्न-ए-उसैमीन का यह क़ौल कि नुमू अपने असल के हौल के ताबे होता है, साथ ही शेयरों की ज़कात के आम उसूल।
पेचीदा इन्फ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Quran 2:267
Hadith
Sahih al-Bukhari 1454
Fiqh
Permanent Committee; al-Uthaymin