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Cryptocurrency Jul 13, 2026

खोए हुए या पहुँच से बाहर क्रिप्टो की ज़कात

Question

मेरे वॉलेट की 'की' (key) खो गई है / मेरी रक़म एक दिवालिया एक्सचेंज में फँसी हुई है और वापसी ग़ैर-यक़ीनी है। क्या इस पर ज़कात वाजिब है?

Ruling (Fatwa)

मुख़्तसर जवाब: जब तक माल वाक़ई आपके क़ब्ज़े और इख़्तियार से बाहर है और उसकी वापसी ग़ैर-यक़ीनी है, उस पर ज़कात वाजिब नहीं — यह 'माल-ए-ज़िमार' (पहुँच से बाहर माल) के हुक्म में है। वापस मिलने पर नया हौल शुरू होगा और साल पूरा होने पर ज़कात अदा की जाएगी। तफ़सील: ज़कात के वाजिब होने की शर्त मुकम्मल मिल्कियत है — यानी माल में तसर्रुफ़ और उससे फ़ायदा उठाने की क़ुदरत। प्राइवेट 'की' (key) का हमेशा के लिए खो जाना या एक्सचेंज का दिवालिया हो जाना यह क़ुदरत ख़त्म कर देता है। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से मनक़ूल उसूल और नाक़ाबिल-ए-वुसूल क़र्ज़ों के बारे में शैख़ इब्ने उसैमीन और लजना दाइमा के मौक़िफ़ के मुताबिक़ ज़कात वापसी तक मुअल्लक़ रहती है; राजेह क़ौल यह है कि उस वक़्त नया हौल शुरू होता है, जबकि वापसी के फ़ौरन बाद एक साल की ज़कात अदा कर देना एहतियात के तौर पर बेहतर है। दलाइल: क़ुरआन 2:286 (अल्लाह किसी जान पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालता); इब्ने माजा 1792 (हौल की शर्त); मशकूक क़र्ज़ों के बारे में लजना दाइमा / शैख़ इब्ने उसैमीन। इत्लाक़: अगर किसी मुतअय्यन हिस्से की वापसी यक़ीनी हो जाए (मसलन अदालत से मंज़ूरशुदा तक़सीम), तो वह हिस्सा अच्छे क़र्ज़ की मानिंद है — आप चाहें तो हर साल उसकी ज़कात अदा करें, या वुसूली के वक़्त हिसाब कर लें। पेचीदा इनफ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।

References

Quran Quran 2:286
Hadith Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani
Fiqh al-Uthaymin; Permanent Committee on māl ḍimār