Question
रिटायरमेंट के वक़्त मुझे पेंशन/जीपीएफ़ के तौर पर एक बड़ी एकमुश्त रक़म मिली है। इस पर ज़कात कब से वाजिब होगी और कैसे अदा करूँ?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: जिस दिन रक़म आपके हाथ में पहुँचे, उसी दिन से हौल शुरू होता है। एक क़मरी साल गुज़रने के बाद निसाब से ऊपर जो कुछ बाक़ी रहे, उस पर 2.5% ज़कात है। जमा होने के पिछले सालों की कोई बक़ाया ज़कात वाजिब नहीं, क्योंकि उस वक़्त मिल्कियत नामुकम्मल थी।
तफ़सील: वुसूल होते ही यह रक़म आपकी बाक़ी नक़दी में शामिल हो जाती है। अगर आप पहले से साहिब-ए-निसाब हैं और आपका ज़कात का एक मुक़र्रर दिन है, तो सबसे आसान तरीक़ा यह है कि उसी सालाना हिसाब में एकमुश्त रक़म भी शामिल कर लें — इस तरह कुछ ज़कात वक़्त से थोड़ा पहले अदा हो जाती है, जो जाइज़ बल्कि बेहतर है। ज़कात के दिन से पहले जो ख़र्च हो जाए वह शुमार नहीं होता; ज़कात उसी पर है जो उस दिन मौजूद हो।
दलाइल: इब्ने माजा 1792 (हौल की शर्त, अल-अल्बानी के नज़दीक सहीह); सहीह बुख़ारी 1405 और सहीह मुस्लिम 979 (निसाब); क़ुरआन 9:34-35 और सहीह मुस्लिम 987 (ज़कात अदा न किए गए ख़ज़ाने पर वईद); और क़ब्ज़े के बाद नए हौल के बारे में लजना दाइमा (स्थायी फ़तवा कमेटी) का फ़तवा।
पेचीदा इनफ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Quran 9:34-35
Hadith
Ibn Majah 1792; Bukhari 1405; Muslim 979, 987
Fiqh
Permanent Committee