Question
गाँव में मेरी धान की ज़मीन है। ज़मीन और उसकी फ़सल की ज़कात कैसे अदा करूँ?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: ज़मीन की क़ीमत पर ज़कात नहीं (सिवाय इसके कि वह बेचने की तिजारती नीयत से रखी गई हो)। ज़कात फ़सल पर है, जो कटाई के दिन ही वाजिब हो जाती है और इसके लिए हौल शर्त नहीं: अगर फ़सल बारिश या क़ुदरती ज़रियों से सींची गई हो तो पैदावार का 10% (उश्र), और अगर ख़र्च करके मसनूई सिंचाई से हो तो 5% (आधा उश्र)। निसाब: पाँच वसक़ ≈ 612–653 किलोग्राम (सा' के अंदाज़े के इख़्तिलाफ़ के मुताबिक़); इससे कम पैदावार पर कुछ वाजिब नहीं।
तफ़सील: धान, गेहूँ, खजूर और किशमिश जैसी ज़ख़ीरा होने वाली और नापी जाने वाली फ़सलों पर उश्र के वाजिब होने पर इत्तिफ़ाक़ है। साल में दो फ़सलें हों तो हर एक का हिसाब अलग होगा। बटाई (मुज़ारअत) में हर फ़रीक़ अपने हिस्से की फ़सल का उश्र अदा करेगा। अगर ज़मीन नक़द किराए पर दी जाए तो मालिक उस किराए को नक़दी की ज़कात के उसूल पर शुमार करेगा, और किसान पर फ़सल का उश्र होगा।
दलाइल: क़ुरआन 6:141 ('कटाई के दिन उसका हक़ अदा करो'); क़ुरआन 2:267; सहीह बुख़ारी 1483 (उश्र और आधा उश्र); सहीह बुख़ारी 1405 और सहीह मुस्लिम 979 (पाँच वसक़ का निसाब)।
पेचीदा इनफ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजूअ करें।
References
Quran
Quran 6:141; 2:267
Hadith
Bukhari 1483, 1405; Muslim 979
Fiqh
consensus on ushr; Ibn Baz