Question
जिस कंपनी का बुनियादी कारोबार हलाल हो मगर उसमें कुछ सूदी आमदनी या क़र्ज़ शामिल हो, उसके शेयरों में सरमाया लगाने और उन पर ज़कात अदा करने का क्या हुक्म है?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: अगर कंपनी का बुनियादी कारोबार ही हराम हो (सूदी बैंकिंग, शराब, जुआ) तो उसके शेयरों की ख़रीद-फ़रोख़्त सरासर नाजाइज़ है। अगर बुनियादी कारोबार हलाल हो मगर सूदी लेन-देन से मिला हुआ हो, तो तक़वा का तक़ाज़ा है कि उससे बचा जाए; जो लोग शरई स्क्रीनिंग के मेयार पर सरमायाकारी करते हैं, उन पर लाज़िम है कि हराम ज़रिए से हासिल आमदनी का हिस्सा निकालकर माल को पाक करें। और जो शेयर आपकी मिल्कियत में हैं उनकी ज़कात हर हाल में फ़र्ज़ है — हराम की मिलावट से ज़कात कभी माफ़ नहीं होती।
तफ़सील: तत्हीर का माल सवाब की उम्मीद के बग़ैर सिर्फ़ उससे नजात पाने के लिए दिया जाता है, और वह किसी सूरत ज़कात में शुमार नहीं हो सकता — 'बेशक अल्लाह पाक है और सिर्फ़ पाक ही को क़बूल फ़रमाता है' (सहीह मुस्लिम 1015)। ख़ुद ज़कात हलाल माल से अदा करनी होगी, शेयर की नौइयत के मुताबिक़ (तिजारती शेयरों पर पूरी बाज़ारी क़ीमत; वरना लंबी मुद्दत वाले तरीक़े के मुताबिक़)।
दलाइल: क़ुरआन 2:275 और 2:279 (सूद); सहीह मुस्लिम 1015; क़ुरआन 5:2 (गुनाह में तआवुन की मुमानिअत); मिली-जुली कंपनियों और तत्हीर के बारे में दलील पर चलने वाले मुआसिर उलमा और फ़िक़ही बोर्ड।
पेचीदा इनफ़िरादी सूरतों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Quran 2:275, 2:279; 5:2
Hadith
Sahih Muslim 1015
Fiqh
contemporary scholars; shariah screening standards