Question
DeFi प्लेटफ़ॉर्म पर कॉइन 'लेंड' करने या लिक्विडिटी देने से सूद जैसा रिटर्न मिलता है। क्या यह जाइज़ है? और जमा किए गए कॉइनों की ज़कात का क्या हुक्म है?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: (1) DeFi 'लेंडिंग' — तयशुदा या घटते-बढ़ते अतिरिक्त रिटर्न के बदले कॉइन क़र्ज़ देना — क़र्ज़ पर शर्त लगाई गई बढ़ोतरी है, यानी रिबा (सूद): नाजाइज़। (2) लिक्विडिटी पूल / यील्ड फ़ार्मिंग: बनावट के हिसाब से हुक्म अलग-अलग है — लेन-देन की फ़ीस में असली साझेदारी एक अलग बहस है, लेकिन ज़्यादातर पूलों में सूदी क़र्ज़ के प्रोटोकॉल, इम्परमानेंट लॉस का ग़रर और हराम टोकन इनाम शामिल होते हैं, इसलिए दलील पर आधारित एहतियाती मौक़िफ़ यही है कि इनसे परहेज़ किया जाए। (3) ज़कात: जो कॉइन आपने जमा किए वे आप ही का माल हैं — अपने ज़कात के दिन निकाली जा सकने वाली क़ीमत का 2.5% अदा करें; सूद वाला हिस्सा हिसाब से बाहर रहेगा (उसे रखना सिरे से जाइज़ ही नहीं)।
दलील: क़ुरआन 2:275; क़ुरआन 2:279 (तुम्हारा असल माल तुम्हारा है); सहीह मुस्लिम 1598 (सूद के सभी पक्षों पर लानत); सहीह मुस्लिम 1513 (ग़रर की मनाही)।
अमल: जो सूद जैसा रिटर्न पहले से जमा हो चुका है, अपने असल कॉइन रखकर बाक़ी को सवाब की नीयत के बिना ख़ैरात कर दें (यह ज़कात नहीं)। सच्ची नफ़ा-नुक़सान की साझेदारी वाले हलाल विकल्प तलाश करें।
पेचीदा निजी मामलों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Quran 2:275, 2:279
Hadith
Muslim 1598, 1513
Fiqh
contemporary scholars on riba/gharar