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Cash, Bank & Savings Jul 13, 2026

घर में रखी नक़दी की ज़कात

Question

क्या घर में रखी हुई नक़दी पर ज़कात वाजिब है, और रक़म जमा करके रखने पर कोई चेतावनी है?

Ruling (Fatwa)

संक्षिप्त उत्तर: जी हाँ, घर में रखी नक़दी पर ज़कात वाजिब है अगर वह निसाब को पहुँच जाए और उस पर एक क़मरी (चांद्र) साल गुज़र जाए। ज़कात अदा किए बिना रक़म जमा करके रखने पर सख़्त अज़ाब की चेतावनी है। तफ़सील: नक़दी (सोना और चांदी) पर सहीह हदीसों की रौशनी में ज़कात फ़र्ज़ है। नबी ﷺ ने फ़रमाया: "जो भी सोने या चांदी का मालिक उसका हक़ (ज़कात) अदा नहीं करता, क़यामत के दिन उसके लिए आग की तख़्तियाँ बनाई जाएँगी..." (सहीह मुस्लिम 987a)। इसमें घर में रखी नक़दी भी शामिल है, क्योंकि नक़दी सोने-चांदी की करेंसी के क़ायम-मक़ाम है। चांदी का निसाब पाँच औक़िया (लगभग 595 ग्राम चांदी) या उसके बराबर नक़दी है, और सोने का निसाब बीस मिस्क़ाल (लगभग 85 ग्राम सोना) है। जब रक़म इस क़ीमत को पहुँच जाए और उस पर एक क़मरी साल गुज़र जाए तो 2.5% ज़कात अदा करना लाज़िम है। ज़कात अदा किए बिना माल जमा करना मज़मूम (निंदनीय) है। नबी ﷺ ने ख़बरदार किया कि जो लोग सोना और चांदी जमा करते हैं और उसे अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते (यानी ज़कात नहीं देते), उन्हें क़यामत के दिन गरम तख़्तियों से अज़ाब दिया जाएगा (सहीह बुख़ारी 1402, सहीह मुस्लिम 992a)। यह हुक्म उस सूरत में भी लागू है जब रक़म घर में रखी हो—घर ज़कात की फ़र्ज़ियत से पनाहगाह नहीं। दलाइल: 1. सहीह मुस्लिम 987a — सोने-चांदी की ज़कात न देने पर सख़्त अज़ाब। 2. सहीह बुख़ारी 1402 — ज़कात दिए बिना सोना-चांदी जमा करना अज़ाब का सबब है। 3. सहीह बुख़ारी 1405 — पाँच औक़िया से कम चांदी पर ज़कात नहीं (निसाब)। 4. सहीह बुख़ारी 1454 — चांदी और सोने की ज़कात के तफ़सीली अहकाम। 5. सहीह मुस्लिम 992a — माल जमा करने और ज़कात न देने वालों के लिए चेतावनी। 6. सहीह बुख़ारी 1468 — ज़कात अदा करने से इनकार एक संगीन मामला है। पेचीदा मसलों में, जैसे मिले-जुले असासों या क़र्ज़ के साथ निसाब का हिसाब, किसी साहिब-ए-इल्म आलिम से रुजू करें।

References

Hadith Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1402; Sahih al-Bukhari 1405; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih Muslim 992a; Sahih al-Bukhari 1468
Fiqh Major Salafi scholars (Ibn Baz, al-Uthaymin, Permanent Committee)