Question
क्या फ़र्ज़ ज़कात ग़ैर-मुस्लिमों को दी जा सकती है, और नफ़ली सदक़े का क्या हुक्म है?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: फ़र्ज़ ज़कात (ज़कात-उल-माल और सदक़ातुल फ़ित्र) ग़ैर-मुस्लिमों को नहीं दी जा सकती। नफ़ली सदक़ा ग़ैर-मुस्लिमों को दिया जा सकता है।
तफ़सील: पेश किए गए दलाइल से मालूम होता है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुआज़ रज़ियल्लाहु अन्हु को यमन भेजा ताकि वे मुसलमानों से ज़कात वसूल करें (P1, P4, P5)। ज़कात मुसलमानों पर फ़र्ज़ है, जैसा कि इस हिदायत से ज़ाहिर है कि इस्लाम क़बूल करने के बाद उन्हें फ़राइज़ की तालीम दी जाए। इन अहादीस में इसकी कोई दलील नहीं कि ज़कात ग़ैर-मुस्लिमों को दी जा सकती है। सूरह अत-तौबा (9:60) में मज़कूर ज़कात के मुस्तहिक़ीन की आठ क़िस्में इन पेश किए गए नुसूस में शामिल नहीं हैं, लेकिन दलाइल से हासिल होने वाला उमूमी उसूल यह है कि ज़कात एक इस्लामी फ़रीज़ा है जो मुसलमानों पर आइद होता है और उनसे वसूल किया जाता है, जिससे मालूम होता है कि यह मुसलमान मुस्तहिक़ीन के लिए है। दूसरी तरफ़ नफ़ली सदक़ा ज़्यादा वसीअ है। उस शख़्स की हदीस जिसने एक ज़ानिया को सदक़ा दिया (P8) यह ज़ाहिर करती है कि सदक़ा गुनाहगारों तक पहुँच सकता है, और बतरीक़-ए-औला ग़ैर-मुस्लिमों को भी दिया जा सकता है, क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसे महदूद नहीं किया। ताहम ग़ैर-मुस्लिमों को नफ़ली सदक़ा देने की सरीह दलील इन नुसूस में बराह-ए-रास्त मौजूद नहीं है, लेकिन दीगर मसादिर (जो यहाँ पेश नहीं किए गए) से उमूमी उसूल जवाज़ का है। पेश किए गए दलाइल की बुनियाद पर मौक़िफ़ यह है कि फ़र्ज़ ज़कात सिर्फ़ मुसलमानों के लिए है, जबकि नफ़ली सदक़ा ग़ैर-मुस्लिमों को दिया जा सकता है।
दलाइल:
1. सहीह बुख़ारी 1395 (P1) – नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुआज़ रज़ियल्लाहु अन्हु को मुसलमानों से ज़कात वसूल करने के लिए भेजा।
2. सहीह बुख़ारी 1496 (P4) – अहल-ए-किताब को पहले इस्लाम की दावत देने, फिर उन्हें ज़कात सिखाने की हिदायत।
3. सहीह बुख़ारी 1458 (P5) – P4 की मानिंद।
4. सहीह मुस्लिम 1022 (P8) – एक ज़ानिया को सदक़ा देना यह ज़ाहिर करता है कि नफ़ली सदक़ा गुनाहगारों तक पहुँच सकता है।
नोट: यह फ़तवा सिर्फ़ पेश किए गए दलाइल पर मबनी है। मख़्सूस क़िस्मों से मुताल्लिक़ पेचीदा मसाइल में किसी साहिब-ए-इल्म आलिम से रुजू करें।
References
Hadith
Sahih al-Bukhari 1395; Sahih al-Bukhari 1496; Sahih al-Bukhari 1458; Sahih Muslim 1022
Fiqh
Based on evidence from Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim; position of Ahl al-Hadith scholars (e.g., Ibn Baz, al-Uthaymin, Permanent Committee)