Question
मेरी रक़म IPO आवेदन में ब्लॉक है — शेयर अलॉट हुए तो रक़म उसमें एडजस्ट हो जाएगी, वरना वापस मिल जाएगी। अगर मेरा ज़कात का दिन इसी बीच आ जाए तो इस रक़म का हिसाब कैसे होगा?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: ब्लॉक रहने के दौरान भी यह रक़म आपकी ही मिल्कियत है — या तो शेयर बनकर लौटेगी या नक़द बनकर; मिल्कियत किसी हाल में हाथ से नहीं गई। इसलिए ज़कात के दिन यह रक़म अपने बाक़ी माल के साथ जोड़कर 2.5% अदा करें। फिर जब शेयर अलॉट हो जाएँ तो आगे उनका हुक्म आपकी नीयत (ट्रेडिंग/लंबी मुद्दत की सरमायाकारी) के मुताबिक़ चलेगा।
तफ़सील: यह रक़म मालदार फ़रीक़ के ज़िम्मे यक़ीनी वुसूली वाले क़र्ज़ (क़र्ज़-ए-क़वी) जैसी है — जारी करने वाला इदारा/बैंक वापसी का पाबंद है। चंद दिनों की मुख़्तसर ब्लॉकिंग न मिल्कियत तोड़ती है न हौल — जैसे चेक क्लियरिंग में मौजूद रक़म। रक़म वापस आ जाए तो कुछ नहीं बदलता; और अलॉटमेंट हो जाए तो नक़दी क़िस्म का माल महज़ एक सूरत से दूसरी सूरत में मुंतक़िल हुआ, हौल जारी रहता है।
दलाइल: क़ुरआन 9:103; ज़कात के वक़्त क़र्ज़ों के हिसाब पर हज़रत उस्मान रज़ियल्लाहु अन्हु का असर (मुअत्ता, किताबुज़-ज़कात); सहीह बुख़ारी 1454; क़र्ज़-ए-क़वी और डिपॉज़िट के बारे में लजना दाइमा का फ़तवा।
पेचीदा इन्फ़िरादी सूरतों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजूअ करें।
References
Quran
Quran 9:103
Hadith
Bukhari 1454; athar of Uthman
Fiqh
Permanent Committee on strong debts