Question
मैं एक ग़ैर-लिस्टेड कारोबार में शरीक (साझेदार) हूँ, जिसके हिस्सों की कोई बाज़ारी क़ीमत नहीं है। अपने हिस्से की ज़कात कैसे हिसाब करूँ?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: यहाँ हिसाब कंपनी के खातों के ज़रिए होगा: कारोबार के क़ाबिल-ए-ज़कात माल (नक़द + बैंक + आज की बिक्री क़ीमत पर बिकने वाला माल-ए-तिजारत + वसूल होने वाले क़र्ज़/लेनदारी, माइनस फ़ौरन अदा होने वाली ज़िम्मेदारियाँ) निकालकर अपनी मिल्कियत के अनुपात से 2.5% अदा करें। मुस्तक़िल (साबित) माल — दुकान, मशीनरी, फ़र्नीचर, गाड़ियाँ — पर कोई ज़कात नहीं।
तफ़सील: लिस्टेड हिस्सों वाला 'पूरी बाज़ारी क़ीमत पर ज़कात' का आसान तरीक़ा यहाँ लागू नहीं होता — क्योंकि कोई बाज़ारी क़ीमत ही नहीं है; लिहाज़ा सीधे बुनियादी तरीक़ा अपनाया जाएगा, जो दलील के ऐतबार से भी असल हुक्म है। बेहतर यह है कि कारोबार एक तय ज़कात-तारीख़ पर मिलकर एक साझा हिसाब करे और हर शरीक को उसका हिस्सा बता दे; वरना हर शरीक अपने हिस्से का हिसाब अपने ज़कात के दिन करे।
दलाइल: क़ुरआन 2:267; पैदावारी (उत्पादक) साबित माल के इस्तिस्ना का उसूल जो सहीह बुख़ारी 1464 से लिया गया है; कारोबारी ज़कात (नक़द + माल-ए-तिजारत + वसूल-तलब क़र्ज़) के बारे में शैख़ इब्न उसैमीन और अल-लजना अद-दाइमा का क़ौल; और AAOIFI शरई मेयार 35 का हिसाबी ढाँचा।
पेचीदा इन्फ़िरादी मसलों में किसी मुस्तनद आलिम-ए-दीन से रुजू करें।
References
Quran
Quran 2:267
Hadith
Sahih al-Bukhari 1464
Fiqh
al-Uthaymin; Permanent Committee; AAOIFI Std 35