Question
मेरी दौलत का बड़ा हिस्सा क्रिप्टो में है। क्या मैं ज़कात सीधे क्रिप्टो (मसलन USDT) भेजकर अदा कर सकता हूँ, या पहले उसे नक़द में बदलना ज़रूरी है?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ, शर्तों के साथ — नक़दी क़िस्म के माल की ज़कात उसी माल से या उसकी बराबर क़ीमत से अदा की जा सकती है। शर्तें: (1) मुस्तहिक़ उसे वाक़ई वसूल, इस्तेमाल या नक़द में तब्दील कर सकता हो और उसकी रज़ामंदी हो; (2) मुंतक़िली के दिन के बाज़ार भाव पर पूरी वाजिब क़ीमत उस तक पहुँचे। अगर मुस्तहिक़ क्रिप्टो इस्तेमाल न कर सकता हो या उससे उसे नुक़सान का अंदेशा हो, तो नक़द में बदलकर देना ही फ़र्ज़ की महफ़ूज़ अदायगी है।
तफ़सील: ज़कात का मक़सद फ़ुक़रा का हक़ीक़ी फ़ायदा है — नबी करीम ﷺ ने मुआज़ रज़ि. से फ़रमाया कि यह अमीरों से लेकर उन्हीं के ग़रीबों को लौटाई जाए, और मवेशियों की ज़कात मवेशियों ही से अदा करने का हुक्म बताता है कि माल की जिंस ही से अदायगी असल क़ायदा है। करेंसी में असल एतबार क़ीमत का है, इसलिए बराबर क़ीमत की कोई भी नक़दी सूरत (टका, डॉलर, स्टेबलकॉइन) दुरुस्त है। उतार-चढ़ाव वाले कॉइन में मुंतक़िली के लम्हे का भाव लें और कुछ बढ़ाकर देना बेहतर है — कोई कमी रह जाए तो वह ज़िम्मे में बाक़ी रहती है।
दलाइल: क़ुरआन 9:103; सहीह बुख़ारी 1395 (हदीस-ए-मुआज़); सहीह बुख़ारी 1454 (अबू बक्र रज़ि. के फ़रमान में जिंस से अदायगी और क़ीमत की तलाफ़ी); और क़ीमत के एतबार का उसूल, लजना दाइमा और शैख़ इब्न उसैमीन के नज़दीक।
पेचीदा इन्फ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Quran 9:103
Hadith
Bukhari 1395, 1454
Fiqh
Permanent Committee; al-Uthaymin on paying by value