Question
मैंने बिटकॉइन बतौर ज़मानत गिरवी रखकर स्टेबलकॉइन में क़र्ज़ लिया है। गिरवी रखे हुए कॉइन और क़र्ज़ में मिली रक़म — दोनों पर ज़कात का हुक्म क्या होगा?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: (1) गिरवी रखा हुआ बिटकॉइन अब भी आपकी मिल्कियत है — रहन (गिरवी) ज़कात को नहीं रोकता; अपने ज़कात के दिन उसकी बाज़ारी क़ीमत हिसाब में शामिल करें। (2) क़र्ज़ में मिले हुए स्टेबलकॉइन जो आपके हाथ में हैं, वे आपके क़ब्ज़े का माल हैं — वे भी हिसाब में आएँगे; क़र्ज़ का बोझ हाथ में मौजूद माल से ज़कात साक़ित नहीं करता (अलबत्ता जल्द वाजिबुल-अदा क़िस्त घटाने की गुंजाइश है)। (3) अगर क़र्ज़ सूदी हो (मुक़र्रर इज़ाफ़ी वापसी) तो यह रिबा है — ख़ुद मुआहदा ही नाजायज़ है; तौबा करें और जल्द से जल्द उससे निकल जाएँ।
तफ़सील: रहन एक जायज़ मुआहदा है — नबी करीम ﷺ ने ख़ुद अपनी ज़िरह गिरवी रखी; लेकिन गिरवी लेने वाला कभी उस माल का मालिक नहीं बनता, इसलिए उसकी ज़कात मालिक ही पर रहती है। अगर प्लेटफ़ॉर्म आपकी ज़मानत लिक्विडेट कर दे तो उस दिन से वह हिस्सा आपके हिसाब से निकल जाएगा। नक़दी की तंगी में गिरवी माल की ज़कात की अदायगी मुल्तवी की जा सकती है — वाजिब ज़िम्मे में बाक़ी रहेगा।
दलाइल: क़ुरआन 2:283 और सहीह बुख़ारी 2068 (रहन); क़ुरआन 9:103 (ज़कात मिल्कियत के ताबे है); क़ुरआन 2:275 और सहीह मुस्लिम 1598 (रिबा); शैख़ इब्न उसैमीन कि क़र्ज़ ज़कात को नहीं रोकता।
पेचीदा इनफ़िरादी सूरतों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Quran 2:283; 9:103
Hadith
Bukhari 2068; Muslim 1598
Fiqh
al-Uthaymin on debt and pledged assets