Question
मैंने महंगे माइनिंग रिग/GPU ख़रीदे हैं। क्या ज़कात इन मशीनों की क़ीमत पर वाजिब है, या सिर्फ़ माइन किए गए कॉइनों पर?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: मशीनों की क़ीमत पर कोई ज़कात नहीं — माइनिंग रिग पैदावार के ज़राए हैं, कारीगर के औज़ार या कारख़ाने की मशीनों जैसे मुस्तक़िल असासे। ज़कात पैदावार पर है: माइन किए गए कॉइन आपकी आमदनी हैं — अपने सालाना ज़कात के दिन ग़ैर-बिके कॉइनों की बाज़ारी क़ीमत और कॉइन बेचकर जमा हुई रक़म, सब मिलाकर निसाब से ऊपर हों तो 2.5% अदा करें।
तफ़सील: सिर्फ़ एक इस्तिसना है: अगर आप ख़ुद रिगों की तिजारत करते हों (दोबारा बेचने की नीयत से स्टॉक करें) तो वे माल-ए-तिजारत बन जाते हैं और बाज़ारी क़ीमत पर उनकी ज़कात वाजिब होगी। इस्तेमालशुदा रिगों की क़ीमत गिरने से हिसाब में कुछ नहीं बदलता, क्योंकि उनकी क़ीमत पर वैसे भी ज़कात नहीं। कारोबारी ख़र्चे (बिजली वग़ैरा) निकालने के बाद जो बचत बाक़ी रहे वही हिसाब में शामिल होगी।
दलाइल: सहीह बुख़ारी 1464 (पैदावारी और इस्तेमाली असासों के इस्तिसना का उसूल); क़ुरआन 2:267 (कमाई पर ज़कात); शैख़ इब्न उसैमीन और लजना दाइमा (मुस्तक़िल फ़तवा कमेटी) कि कारख़ानों और मशीनों पर ज़कात आमदनी में है, प्लांट की क़ीमत में नहीं।
पेचीदा इनफ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Quran 2:267
Hadith
Sahih al-Bukhari 1464
Fiqh
al-Uthaymin; Permanent Committee on productive assets