Fatwa Library

The SGT Fatwa Library brings together verified Islamic rulings on Zakat for modern assets — cryptocurrency, stocks and shares, pension and GPF funds, real estate, and debts and loans. Each fatwa cites its Quran, Hadith, and scholarly references so you can apply the ruling with confidence, and every entry is available in six languages — বাংলা, English, العربية, اردو, Bahasa Indonesia and हिन्दी. Use the language buttons above and the filters below, then open any entry to read the full ruling and the evidence behind it.

Livestock & Agriculture

काम करने वाले और हल जोतने वाले जानवरों की ज़कात

क्या हल जोतने के लिए इस्तेमाल होने वाले बैल और ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवर मवेशियों की ज़कात के दायरे में आते हैं?

मुख़्तसर जवाब: नहीं, हल जोतने, ढुलाई या दूसरे कामों में इस्तेमाल होने वाले बैल और दूसरे जानवर मवेशियों की ज़कात के तहत नहीं आते, क्योंकि ज़कात की फ़र्ज़ियत ख़ास तौर पर उन चरने वाले (साइमा) जानवरों पर है जो तिजारत या पैदावार के लि…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1459; Sahih al-Bukhari 1405; Sahih al-Bukhari 1447; Sahih Muslim 979a• Fiqh: Majority view: Ibn Baz, al-Uthaymin, Permanent Committee
Gold, Silver & Jewelry

सोने की ज़कात: वज़न के हिसाब से या बाज़ार क़ीमत से?

क्या मैं अपने सोने की बाज़ार क़ीमत का 2.5% निकालूँ, या उसके वज़न का 2.5% सोना दूँ?

मुख़्तसर जवाब: आप सोने की ज़कात या तो उसके वज़न का 2.5% (यानी ख़ुद सोना) देकर अदा कर सकते हैं, या उसकी बाज़ार क़ीमत नक़द के रूप में दे सकते हैं। दोनों तरीक़े जायज़ हैं, लेकिन दलील से मालूम होता है कि वुजूब क़ीमत पर है, और क़ीमत अदा…
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Hadith: Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1448; Sahih al-Bukhari 1422• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee for Scholarly Research and Ifta
Gold, Silver & Jewelry

सोने की परत चढ़े और मिली-जुली कैरेट के ज़ेवर की ज़कात

सोने की परत चढ़ी चीज़ों और मिली-जुली कैरेट (18k/22k) के नग जड़े ज़ेवर की ज़कात मैं कैसे निकालूँ?

मुख़्तसर जवाब: सोने की परत चढ़ी चीज़ों पर ज़कात सिर्फ़ उसी सूरत में वाजिब है जब उनमें सोने की मिक़दार क़ाबिल-ए-ज़िक्र हो (निसाब तक पहुँचे) और वह अलग की जा सके या असल क़ीमत उसी की हो; मिली-जुली कैरेट के ज़ेवर का अंदाज़ा ख़ालिस सोने के …
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Quran: Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih al-Bukhari 1404; Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1447; Sahih al-Bukhari 1459• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
Gold, Silver & Jewelry

मर्दों के लिए सोना और हराम सोने की चीज़ों की ज़कात

मर्दों के लिए सोना पहनना हराम है — अगर किसी मर्द के पास सोने की घड़ी या ज़ंजीर हो तो इसका क्या हुक्म है और क्या इस पर ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: मर्दों के लिए सोना पहनने की हुर्मत दूसरी सहीह हदीसों से साबित है (जो यहाँ नहीं दी गई हैं)। लेकिन दी गई दलीलों की बुनियाद पर, किसी मर्द की मिल्कियत में मौजूद सोने पर ज़कात वाजिब है अगर वह निसाब को पहुँच जाए और कि…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1405; Sahih al-Bukhari 1447• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
Gold, Silver & Jewelry

हीरे, मोती और क़ीमती नगीनों की ज़कात

क्या मेरे ज़ेवर में जड़े हीरे, मोती, याक़ूत (रूबी) और दूसरे क़ीमती नगीनों पर ज़कात फ़र्ज़ है?

मुख़्तसर जवाब: हीरे, मोती, याक़ूत या दूसरे क़ीमती नगीनों पर ख़ुद-ब-ख़ुद ज़कात फ़र्ज़ नहीं, चाहे वे ज़ेवर में जड़े हों या न हों। ज़कात सिर्फ़ सोने और चाँदी पर फ़र्ज़ है (उनके ज़ेवर समेत) अगर वे निसाब को पहुँच जाएँ, जैसा कि सहीह अहादीस में …
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1466; Sahih al-Bukhari 1405; Sahih Muslim 987a• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee for Islamic Research and Ifta
Gold, Silver & Jewelry

सोने के बुलियन और निवेश के सिक्कों पर ज़कात

मेरे पास निवेश के तौर पर सोने की छड़ें (बार) और सिक्के हैं — इन पर ज़कात कैसे निकाली जाए?

संक्षिप्त जवाब: सोने के बुलियन और निवेश के सिक्कों पर ज़कात वाजिब है। अगर कुल सोना निसाब (कम से कम हद) तक पहुँच जाए और उस पर पूरा क़मरी (चांद्र) साल गुज़र जाए, तो आप पर उसकी क़ीमत का 2.5% अदा करना फ़र्ज़ है। तफ़्सील: सोने और चांदी …
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Quran: Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1447• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee for Islamic Research and Ifta
Gold, Silver & Jewelry

टूटे हुए सोने और बैंक लॉकर में रखे सोने की ज़कात

जो टूटा हुआ/स्क्रैप सोना मैं अब नहीं पहनता और बैंक लॉकर में बिना इस्तेमाल रखा हुआ सोना, क्या उन पर ज़कात फ़र्ज़ है?

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ, टूटे हुए/स्क्रैप सोने और बैंक लॉकर में रखे हुए सोने पर ज़कात फ़र्ज़ है, बशर्ते वह निसाब (कम से कम मिक़दार) को पहुँच जाए और उस पर एक मुकम्मल क़मरी साल गुज़र जाए। तफ़सील: क़ुरआन और सहीह हदीस में इस्तेमाल किए गए और…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1406• Fiqh: Based on Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim, and the Qur'an; the position of Ahl al-Hadith and the majority of scholars.
Foundations & Conditions

ज़कात क्या है और इस्लाम के रुक्न के रूप में इसका मक़ाम

ज़कात क्या है, यह इस्लाम का रुक्न क्यों है, और दीन में इसका क्या मक़ाम है?

संक्षिप्त जवाब: ज़कात इस्लाम में एक फ़र्ज़ इबादत है, जो साहिब-ए-निसाब मुसलमानों पर लाज़िम करती है कि वे हर साल अपने माल का एक मुक़र्रर हिस्सा हक़दार लोगों को अदा करें। यह इस्लाम के पाँच रुक्न में से एक है, जो इसके मरकज़ी किरदार और फ़र्ज़…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:71• Hadith: Sahih al-Bukhari 1396; Sahih al-Bukhari 1454• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee for Islamic Research and Ifta
Foundations & Conditions

ज़कात अदा करने की फ़ज़ीलत और सवाब

जो लोग अपनी ज़कात अदा करते हैं उनके लिए किन रूहानी फ़ायदों और इनामों का वादा किया गया है?

मुख़्तसर जवाब: ज़कात अदा करने से बेशुमार रूहानी सवाब हासिल होता है, जिनमें अल्लाह के नज़दीक माल में कई गुना बढ़ोतरी, जन्नत में इज़्ज़त वाला अज्र, गुनाहों से पाकीज़गी, और क़यामत के दिन सख़्त अज़ाब से नजात शामिल हैं। क़ुरआन और सहीह हदीसों…
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Quran: Surah Al-Hadid 57:18• Hadith: Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1452; Sahih Muslim 1017a; Sahih Muslim 1000a; Sahih Muslim 990a• Fiqh: Qur'an (Surah Al-Hadid) and Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim
Foundations & Conditions

नए मुसलमान और पिछले सालों की ज़कात

क्या नए मुसलमान पर इस्लाम से पहले के सालों की ज़कात वाजिब है, और उसका पहला हौल (साल की मुद्दत) कब से शुरू होता है?

मुख़्तसर जवाब: नए मुसलमान पर इस्लाम क़ुबूल करने से पहले के सालों की ज़कात वाजिब नहीं है, और उसका पहला हौल (एक साल पूरा होने की मुद्दत) इस्लाम क़ुबूल करने के बाद निसाब (वह कम से कम माल जिस पर ज़कात फ़र्ज़ होती है) का मालिक बनने के ल…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:71• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1436• Fiqh: Ahle Hadith scholars; Permanent Committee for Islamic Research and Ifta (Saudi Arabia)
Foundations & Conditions

ज़कात के क़ाबिल माल में 'बढ़ोतरी' (नमा) की शर्त

ज़कात सिर्फ़ 'बढ़ने वाले' माल पर क्यों फ़र्ज़ है, और इससे ज़ाती इस्तेमाल की चीज़ें कैसे मुस्तसना (छूट में) हो जाती हैं?

मुख़्तसर जवाब: ज़कात उस माल पर फ़र्ज़ है जिसमें बढ़ने या इज़ाफ़े की सलाहियत हो (नमा), जैसे मवेशी, तिजारती सामान, ज़िराअती पैदावार और तिजारत के लिए इस्तेमाल होने वाला सोना-चांदी। ज़ाती इस्तेमाल की चीज़ें जैसे रहाइशी मकान, लिबास, फ़र्नीच…
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Quran: Surah Ar-Rum 30:39; Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1395• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
Foundations & Conditions

जब आपको अपने ज़कात लायक़ माल की ठीक-ठीक मिक़दार का यक़ीन न हो

अगर मैं अपने सही माल या गुज़िश्ता सालों का ठीक-ठीक तअय्युन न कर सकूँ, तो मैं अपनी ज़कात का अंदाज़ा कैसे लगाऊँ?

मुख़्तसर जवाब: आपको अपने ज़कात लायक़ माल का एक मुख़लिस और मुनासिब अंदाज़ा लगाना ज़रूरी है, और इस फ़र्ज़ को अदा करने के लिए एहतियात के पहलू को इख़्तियार करना चाहिए, क्योंकि ज़कात एक सख़्त फ़र्ज़ है और लाइल्मी इसमें कोई उज़्र नहीं बनती। तफ़सील…
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Quran: Surah Ar-Rum 30:39• Hadith: Sahih al-Bukhari 1403; Sahih Muslim 987a; Sahih Muslim 990a; Sahih Muslim 94d; Sahih al-Bukhari 1454• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
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