Question
जो लोग अपनी ज़कात अदा करते हैं उनके लिए किन रूहानी फ़ायदों और इनामों का वादा किया गया है?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: ज़कात अदा करने से बेशुमार रूहानी सवाब हासिल होता है, जिनमें अल्लाह के नज़दीक माल में कई गुना बढ़ोतरी, जन्नत में इज़्ज़त वाला अज्र, गुनाहों से पाकीज़गी, और क़यामत के दिन सख़्त अज़ाब से नजात शामिल हैं। क़ुरआन और सहीह हदीसों में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि जो लोग इस फ़र्ज़ को अदा करते हैं उनके लिए कई गुना बढ़ोतरी और अल्लाह की रज़ा का वादा किया गया है।
तफ़्सील: ज़कात महज़ एक माली फ़र्ज़ नहीं बल्कि एक इबादत है जो रूह और माल को पाक करती है। अल्लाह तआला सूरह अल-हदीद 57:18 में फ़रमाते हैं कि जो लोग सदक़ा (ज़कात समेत) देते हैं और अल्लाह को क़र्ज़-ए-हसना देते हैं, उनके लिए इसे कई गुना बढ़ा दिया जाएगा और उनके लिए इज़्ज़त वाला अज्र (जन्नत) है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ज़कात न देने वालों को सख़्त अज़ाब से डराया है – जहन्नम में आग से गर्म की गई तख़्तियाँ उनके पहलुओं, पेशानियों और पीठों पर दाग़ी जाएँगी (सहीह मुस्लिम 987a)। इसके बरअक्स, ज़कात अदा करना इस अज़ाब से बचाता है और अल्लाह की रहमत लाता है। सहीह मुस्लिम 990a में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि जो लोग सोना और चाँदी जमा करते हैं और उसकी ज़कात नहीं देते वे ख़सारे में हैं, यानी जो अदा करते हैं वे कामयाब हैं। इसके अलावा, ज़कात अदा करना सच्चे ईमान की निशानी और अल्लाह की रहमत पाने का ज़रिया है (सहीह मुस्लिम 1017a)। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ज़ेवरात से भी सदक़ा देने की तरग़ीब दी (सहीह मुस्लिम 1000a), और आपने एक बद्दू की तारीफ़ की जिसने अपने ऊँटों की ज़कात अदा की, और फ़रमाया कि अल्लाह उसके नेक आमाल जानता है (सहीह बुख़ारी 1452)।
दलाइल:
1. सूरह अल-हदीद 57:18 – सदक़ा/ज़कात देने वालों के लिए कई गुना बढ़ोतरी और इज़्ज़त वाला अज्र।
2. सहीह मुस्लिम 987a – सोने और चाँदी की ज़कात न देने पर सख़्त अज़ाब।
3. सहीह मुस्लिम 990a – जो ज़कात दिए बग़ैर माल जमा करते हैं वे ख़सारे में हैं।
4. सहीह मुस्लिम 1017a – सदक़ा मुसीबत को दूर करता है और अल्लाह का अज्र लाता है।
5. सहीह मुस्लिम 1000a – नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने औरतों को ज़ेवरात से भी सदक़ा देने का हुक्म दिया।
6. सहीह बुख़ारी 1452 – नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बद्दू की ज़कात अदायगी को नेक अमल तस्लीम किया।
तनबीह: यह फ़तवा सिर्फ़ फ़राहम किए गए दलाइल पर मबनी है। ज़कात के हिसाब या तक़सीम से मुताल्लिक़ पेचीदा मामलों के लिए किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।
References
Quran
Surah Al-Hadid 57:18
Hadith
Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1452; Sahih Muslim 1017a; Sahih Muslim 1000a; Sahih Muslim 990a
Fiqh
Qur'an (Surah Al-Hadid) and Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim