Fatwa Library

The SGT Fatwa Library brings together verified Islamic rulings on Zakat for modern assets — cryptocurrency, stocks and shares, pension and GPF funds, real estate, and debts and loans. Each fatwa cites its Quran, Hadith, and scholarly references so you can apply the ruling with confidence, and every entry is available in six languages — বাংলা, English, العربية, اردو, Bahasa Indonesia and हिन्दी. Use the language buttons above and the filters below, then open any entry to read the full ruling and the evidence behind it.

Cryptocurrency

NFT की ज़कात

मैंने कुछ NFT ख़रीदे हैं — कुछ दोबारा बेचने के लिए, और एक सिर्फ़ अपने निजी संग्रह के लिए। NFT पर ज़कात किस तरह लागू होगी?

मुख़्तसर जवाब: NFT माल की तरह हैं — नीयत ही हुक्म तय करती है। (क) जो NFT मुनाफ़े पर दोबारा बेचने की नीयत से ख़रीदे गए हों वे तिजारती माल हैं: हर साल उनकी असल बाज़ारी क़ीमत (आज बेचने पर जो मिले) का 2.5% ज़कात वाजिब है। (ख) निजी …
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Bukhari 1, 1464• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on trade goods
Cryptocurrency

मीम कॉइन और जुए जैसी सट्टेबाज़ी

दोस्त रातों-रात मुनाफ़े के लालच में मीम कॉइन के 'पंप' के पीछे भागते हैं। क्या इस तरह की ट्रेडिंग जायज़ है? और इस तरह रखे गए कॉइनों पर ज़कात का क्या हुक्म है?

मुख़्तसर जवाब: (1) जिन टोकनों की कोई असली उपयोगिता या प्रोजेक्ट नहीं — जिनकी क़ीमत सिर्फ़ हाइप और 'किसी बड़े बेवक़ूफ़ की तलाश' के खेल पर चलती है — उनमें जुए जैसा ख़तरा और हद से ज़्यादा ग़रर पाया जाता है, इसलिए उनका मामला नाजायज़ होने …
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Quran: Quran 5:90; 2:188• Hadith: Muslim 1513, 102• Fiqh: contemporary scholars on gharar/speculation
Cryptocurrency

क्या ज़कात ख़ुद क्रिप्टो में अदा की जा सकती है?

मेरी दौलत का बड़ा हिस्सा क्रिप्टो में है। क्या मैं ज़कात सीधे क्रिप्टो (मसलन USDT) भेजकर अदा कर सकता हूँ, या पहले उसे नक़द में बदलना ज़रूरी है?

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ, शर्तों के साथ — नक़दी क़िस्म के माल की ज़कात उसी माल से या उसकी बराबर क़ीमत से अदा की जा सकती है। शर्तें: (1) मुस्तहिक़ उसे वाक़ई वसूल, इस्तेमाल या नक़द में तब्दील कर सकता हो और उसकी रज़ामंदी हो; (2) मुंतक़िली के …
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1395, 1454• Fiqh: Permanent Committee; al-Uthaymin on paying by value
Stocks & Shares

प्राइवेट कंपनी या साझेदारी के हिस्से की ज़कात

मैं एक ग़ैर-लिस्टेड कारोबार में शरीक (साझेदार) हूँ, जिसके हिस्सों की कोई बाज़ारी क़ीमत नहीं है। अपने हिस्से की ज़कात कैसे हिसाब करूँ?

मुख़्तसर जवाब: यहाँ हिसाब कंपनी के खातों के ज़रिए होगा: कारोबार के क़ाबिल-ए-ज़कात माल (नक़द + बैंक + आज की बिक्री क़ीमत पर बिकने वाला माल-ए-तिजारत + वसूल होने वाले क़र्ज़/लेनदारी, माइनस फ़ौरन अदा होने वाली ज़िम्मेदारियाँ) निकालकर अपन…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1464• Fiqh: al-Uthaymin; Permanent Committee; AAOIFI Std 35
Stocks & Shares

IPO आवेदन में ब्लॉक पड़ी रक़म की ज़कात

मेरी रक़म IPO आवेदन में ब्लॉक है — शेयर अलॉट हुए तो रक़म उसमें एडजस्ट हो जाएगी, वरना वापस मिल जाएगी। अगर मेरा ज़कात का दिन इसी बीच आ जाए तो इस रक़म का हिसाब कैसे होग…

मुख़्तसर जवाब: ब्लॉक रहने के दौरान भी यह रक़म आपकी ही मिल्कियत है — या तो शेयर बनकर लौटेगी या नक़द बनकर; मिल्कियत किसी हाल में हाथ से नहीं गई। इसलिए ज़कात के दिन यह रक़म अपने बाक़ी माल के साथ जोड़कर 2.5% अदा करें। फिर जब शेयर अलॉट…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1454; athar of Uthman• Fiqh: Permanent Committee on strong debts
Real Estate

गिरवी रखी ज़मीन और भोग-बंधक का हुक्म

क़र्ज़ की ज़मानत में ज़मीन गिरवी रखी गई है — देहात में रायज 'भोग-बंधक' में क़र्ज़ देने वाला ज़मीन पर खेती करके पैदावार खुद ले लेता है। इन सूरतों के अहकाम और ज़कात क्या है…

मुख़्तसर जवाब: (1) गिरवी रखी ज़मीन बदस्तूर मालिक ही की रहती है — ज़ाती/ज़रई ज़मीन पर मामूल के अहकाम बाक़ी रहते हैं (क़ीमत पर ज़कात नहीं; फ़सल पर उश्र), और तिजारती माल वाली ज़मीन गिरवी होने के बावजूद बाज़ारी क़ीमत पर ज़कात के ताबे रहती …
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Quran: Quran 2:283, 2:275• Hadith: Sahih al-Bukhari 2068• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on pledge yield
Real Estate

डेवलपर को ज़मीन देकर फ़्लैटों के हिस्से के समझौते की ज़कात

मैंने अपनी ज़मीन डेवलपर को दी है और समझौते के मुताबिक़ मुझे कुछ फ़्लैट मिलेंगे; तामीर जारी है। अब और फ़्लैटों की हैंडओवर के बाद ज़कात का हिसाब क्या होगा?

मुख़्तसर जवाब: हुक्म नीयत के मुताबिक़ है: (क) अगर फ़्लैट अपनी या घरवालों की रिहाइश के लिए हों — तो उन पर ज़कात नहीं, न तामीर के दौरान न हैंडओवर के बाद; (ख) अगर किराए पर देने की नीयत हो — तो फ़्लैटों की क़ीमत पर ज़कात नहीं, सिर्फ़ है…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Bukhari 1, 1464• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on real estate
Pension & GPF

लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी की जमा रक़म की ज़कात

मैं कई सालों से लाइफ़ इंश्योरेंस के प्रीमियम अदा कर रहा हूँ; मुद्दत पूरी होने पर मुझे अपनी जमा रक़म बोनस समेत मिलेगी। इस पॉलिसी का शरई हुक्म और इसकी ज़कात क्या है?

मुख़्तसर जवाब: (1) रिवाजी (कन्वेंशनल) लाइफ़ इंश्योरेंस में सूद और हद से ज़्यादा ग़ैर-यक़ीनी कैफ़ियत (ग़रर) दोनों जमा हैं, इसलिए दलील पर चलने वाले उलमा ने इसे नाजाइज़ क़रार दिया है — नई पॉलिसी न लें और जहाँ मुमकिन हो मौजूदा पॉलिसी से…
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Quran: Quran 2:275, 2:279; 5:2• Hadith: Sahih Muslim 1513, prohibition of gharar• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on insurance/takaful
Pension & GPF

सरकारी बचत सर्टिफ़िकेट की ज़कात और उसके 'मुनाफ़े' का हुक्म

मैंने अपनी रिटायरमेंट की रक़म से सरकारी बचत सर्टिफ़िकेट ख़रीदे हैं — इन पर हर तीन महीने बाद तयशुदा दर से मुनाफ़ा मिलता है। ज़कात और इस मुनाफ़े का क्या हुक्म है?

मुख़्तसर जवाब: (1) बचत सर्टिफ़िकेट की असल रक़म आपका माल है — चूँकि मियाद पूरी होने से पहले कैश कराना मुमकिन है, इसलिए हर साल इसे अपनी बाक़ी नक़दी के साथ जोड़कर 2.5% ज़कात अदा करें। (2) तयशुदा दर वाला 'मुनाफ़ा' दरअसल सरकार को दिए …
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Quran: Quran 2:275, 2:279• Hadith: Sahih Muslim 1598• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz
Debts & Loans

क़िस्तों पर बिक्री की बक़ाया रक़मों की ज़कात

मेरी दुकान से क़िस्तों पर माल बिकता है — ग्राहकों के ज़िम्मे काफ़ी रक़म बक़ाया जमा हो गई है। कारोबार की ज़कात में इस बक़ाया को कैसे गिनूँ? और क्या क़िस्तों पर क़ीमत ज़्यादा रख…

मुख़्तसर जवाब: (1) ख़ुशहाल और बाक़ायदा अदायगी करने वाले ग्राहकों के ज़िम्मे बक़ाया रक़में 'क़वी (मज़बूत) क़र्ज़' हैं — पूरी बक़ाया क़ीमत (आने वाली क़िस्तों समेत) अपने सालाना कारोबारी ज़कात के हिसाब (नक़द + माल-ए-तिजारत + बक़ाया रक़में) में श…
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Quran: Quran 2:275, 2:282, 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 2068• Fiqh: Permanent Committee; al-Uthaymin
Debts & Loans

अदा न किए गए महर की ज़कात

मेरा महर पूरी तरह अदा नहीं हुआ — कुछ हिस्सा वाजिबुल-अदा होकर बाक़ी है और कुछ 'माँगने पर अदा' यानी मुअज्जल रखा गया है। क्या बीवी की हैसियत से मुझे इस वाजिबुल-वुसूल …

मुख़्तसर जवाब: महर शौहर के ज़िम्मे बीवी का क़र्ज़ है — इसका हिसाब क़र्ज़ ही के क़ायदों पर होगा: (क) शौहर ख़ुशहाल हो और माँगने पर अदा कर दे तो यह 'क़वी (मज़बूत) क़र्ज़' है: अगर आप निसाब की मालिक हैं तो हर साल इसे अपनी ज़कात के हिसाब में श…
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Quran: Quran 4:4• Hadith: Sahih al-Bukhari 2387• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on debt zakat
Cryptocurrency

क्रिप्टो में तनख़्वाह मिलने पर ज़कात

मैं अपनी फ्रीलांसिंग/रिमोट काम की उजरत क्रिप्टो (USDT वग़ैरह) में पाता हूँ। इस आमदनी की ज़कात का हिसाब कैसे करूँ?

मुख़्तसर जवाब: क्रिप्टो में मिलने वाली उजरत का वही हुक्म है जो नक़द तनख़्वाह का है — ज़कात आमदनी पर नहीं बल्कि बचत पर है। जो ख़र्च हो जाए उस पर ज़कात नहीं; आपके ज़कात के दिन वॉलेट में जो कुछ बाक़ी रहे, उसे अपनी दूसरी नक़दी के साथ मिलाक…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Bukhari 1454; Ibn Majah 1792• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin on salary zakat
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