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Stocks & Shares Jul 13, 2026

फ्यूचर्स, ऑप्शंस और शॉर्ट सेलिंग

Question

मेरा ब्रोकर फ्यूचर्स, ऑप्शंस और शॉर्ट सेलिंग की सुविधा देता है। क्या ये जायज़ हैं? और ऐसी पोज़ीशनों में लगे हुए पैसे की ज़कात का क्या हुक्म है?

Ruling (Fatwa)

मुख़्तसर जवाब: दलील पर आधारित उलमा और फ़िक़्ह अकादमियों का फ़ैसला यह है: (1) शॉर्ट सेलिंग — यानी जो चीज़ आपकी मिल्कियत में नहीं उसे बेचना — हदीस की सरीह मुमानिअत में दाख़िल है: नाजायज़। (2) प्रचलित फ्यूचर्स/ऑप्शंस — जिनमें दोनों मुआवज़े मुअख़्ख़र (टाले हुए) होते हैं, ख़ुद अक़्द ही की ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त होती है, और वाहिद मक़सद सिर्फ़ क़ीमत का फ़र्क़ होता है — ग़रर और जुए से मुशाबहत की बिना पर नाजायज़। (3) ज़कात: ब्रोकरेज में आपकी हक़ीक़ी इक्विटी क़ीमत, ऐसी पोज़ीशनों में फँसे हुए मार्जिन/प्रीमियम समेत, आपके ज़कात के दिन हिसाब में आएगी — अक़्द का गुनाह अलग चीज़ है और माल की ज़कात अलग। दलाइल: 'जो चीज़ तुम्हारे पास नहीं उसे मत बेचो' — अबू दाऊद 3503, तिर्मिज़ी 1232 (अलबानी के नज़दीक सहीह); सहीह मुस्लिम 1513 (ग़रर); क़ुरआन 5:90 (जुआ); और बैनुल-अक़वामी इस्लामी फ़िक़्ह अकादमी (जेद्दा) और दलील पर आधारित मौजूदा उलमा का प्रचलित मुश्तक़्क़ात (डेरिवेटिव्स) के बारे में फ़ैसला। अमल: ऐसी पोज़ीशनें ख़त्म करें और हलाल स्पॉट-मिल्कियत पर आधारित सरमायाकारी की तरफ़ लौट आएँ। मुश्तक़्क़ात से हासिल मुनाफ़े से तौबा के साथ दस्तबरदार हो जाएँ, उसे सवाब की नीयत के बग़ैर सदक़ा कर दें — ज़कात के तौर पर नहीं; आपका असल सरमाया आपका ही रहेगा और हस्बे-मामूल उस पर ज़कात वाजिब होगी। पेचीदा इन्फ़िरादी मामलों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।

References

Quran Quran 5:90
Hadith Abu Dawud 3503; Muslim 1513
Fiqh Islamic Fiqh Academy Jeddah; contemporary scholars