Question
बटाई में और जब मैं खेती की ज़मीन किराए पर लेता हूँ, तो उश्र कौन अदा करेगा — ज़मीन का मालिक या काश्तकार?
Ruling (Fatwa)
संक्षिप्त जवाब: सहीह बुख़ारी 1483 से लिए गए आम उसूल के आधार पर, उश्र (या आधा उश्र) ख़ुद ज़िराअती पैदावार पर वाजिब है। इसलिए फ़सल काटने के वक़्त जो शख़्स फ़सल का मालिक हो, उसी पर अपने हिस्से का उश्र अदा करना वाजिब है। बटाई में ज़मीन का मालिक और काश्तकार दोनों अपने मुआहिदे के मुताबिक़ फ़सल के एक हिस्से के मालिक होते हैं; हर एक को अपने-अपने हिस्से का उश्र अदा करना होगा अगर वह हिस्सा निसाब (पाँच वसक़, यानी तक़रीबन 653 किलोग्राम बुनियादी ग़ल्ला) तक पहुँच जाए। मुक़र्रर किराए की लीज़ में काश्तकार पूरी फ़सल का मालिक होता है इसलिए वही उश्र देगा; ज़मीन का मालिक किराया वसूल करता है जो ज़िराअती पैदावार नहीं है और उस पर उश्र वाजिब नहीं (हालाँकि शर्तें पूरी होने पर उस पर नक़दी/माल की ज़कात वाजिब हो सकती है)।
दलाइल:
1. सहीह बुख़ारी 1483: नबी ﷺ ने फ़रमाया: "जो ज़मीन बारिश के पानी या क़ुदरती नहरों के पानी से सेराब हो... उस पर उश्र (दसवाँ हिस्सा) वाजिब है; और जो ज़मीन कुएँ से सेराब हो, उस पर आधा उश्र (बीसवाँ हिस्सा) वाजिब है।" इससे साबित होता है कि वुजूब ज़मीन की पैदावार पर है, न कि ख़ुद ज़मीन या किराए की आमदनी पर।
2. ज़कात का आम उसूल: फ़सलों की ज़कात फ़सल काटने के वक़्त फ़सल के मालिक पर वाजिब है (देखिए निसाब से मुताल्लिक़ हदीस सहीह बुख़ारी 1405, 1459 वग़ैरा, जो ख़ुद फ़सल के बारे में हैं)।
नोट: मज़कूरा अहादीस बटाई या लीज़ को साफ़ तौर पर बयान नहीं करतीं, इसलिए हुक्म इस आम क़ायदे को लागू करके अख़्ज़ किया गया है कि उश्र कटी हुई फ़सल की मिल्कियत के ताबे है। पेचीदा मुआहिदों के लिए किसी माहिर आलिम से रुजूअ करें।
तंबीह: यह फ़तवा सिर्फ़ फ़राहम कर्दा दलाइल पर मबनी है। मख़सूस मामलात के लिए आपको अहल-ए-हदीस के किसी आलिम से रुजूअ करना चाहिए।
References
Hadith
Sahih al-Bukhari 1483
Fiqh
Based on the general principle from Sahih al-Bukhari 1483; applied by scholars of Ahl al-Hadith such as Ibn Baz, al-Uthaymin, and the Permanent Committee for Islamic Research and Ifta.