Question
अपने करंट और सेविंग्स बैंक अकाउंट में मौजूद रक़म की ज़कात कैसे अदा करूँ?
Ruling (Fatwa)
मुख़्तसर जवाब: बैंक अकाउंट (करंट और सेविंग्स) में मौजूद रक़म पर ज़कात वाजिब है, बशर्ते वह निसाब तक पहुँच जाए और एक क़मरी (चांद्र) साल आपकी मिल्कियत में रहे। नक़दी का निसाब चांदी पर आधारित है: पाँच औक़िया (लगभग 595 ग्राम चांदी) या उसकी क़ीमत। अगर आपका बैलेंस क़मरी साल के शुरू और आख़िर में इस मिक़दार के बराबर या उससे ज़्यादा हो, तो आप पर कुल बैलेंस का 2.5% बतौर ज़कात अदा करना वाजिब है (साल के दौरान जमा होने वाली अतिरिक्त बचत समेत)। आप नक़द या उसके बराबर अदा कर सकते हैं। दलाइल: 1. सहीह बुख़ारी 1404 और आयत (9:34) में सोना-चांदी जमा करके ज़कात अदा न करने पर सख़्त वईद (चेतावनी) है, जो ज़ाहिर करती है कि नक़दी के बराबर माल पर भी ज़कात वाजिब है। 2. सहीह बुख़ारी 1454 (अबू बक्र रज़ि. का ख़त) में चांदी का निसाब बयान हुआ है: 'पाँच औक़िया से कम चांदी पर कोई ज़कात नहीं।' 3. सहीह बुख़ारी 1403: ज़कात छोड़ने पर सख़्त वईद, जो इसकी फ़र्ज़ियत को ज़ाहिर करती है। 4. सहीह बुख़ारी 1395: मुआज़ रज़ि. को यमन भेजा गया ताकि वे ज़कात की तालीम दें, जिससे यह एक रुक्न के तौर पर साबित होती है। कई अकाउंट, क़र्ज़, या ग़ैर-बराबर बैलेंस से जुड़े पेचीदा मसलों के लिए किसी साहिब-ए-इल्म आलिम से रुजू करें।
References
Hadith
Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1395
Fiqh
Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim; as understood by the Salaf and Ahl al-Hadith scholars