Question
क्या मैं अपनी ज़कात अपनी तरफ़ से बाँटने के लिए किसी रिश्तेदार या कमेटी को इख़्तियार दे सकता हूँ?
Ruling (Fatwa)
संक्षिप्त जवाब: जी हाँ, अपनी ज़कात अपनी तरफ़ से बाँटने के लिए किसी अमानतदार रिश्तेदार या कमेटी को वकील बनाना जायज़ है। यह नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और ख़ुलफ़ा-ए-राशिदीन के साबितशुदा अमल पर मबनी है, जो ज़कात की वसूली और तक़्सीम के लिए आमिलीन (कारकुन) मुक़र्रर फ़रमाते थे। मुक़र्रर किए गए शख़्स का अमानतदार होना ज़रूरी है, और उसे चाहिए कि ज़कात को क़ुरआन (सूरह अत-तौबा: 60) में बयान किए गए आठ मसारिफ़ (मदों) के मुताबिक़ तक़्सीम करे। ज़कात के दुरुस्त अदा होने को यक़ीनी बनाने की ज़िम्मेदारी असल मालिक पर रहती है, लेकिन अगर वकील अमानतदार हो तो ज़िम्मेदारी अदा हो जाती है।
दलाइल:
1. सहीह बुख़ारी 1468: नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक शख़्स को ज़कात वसूल करने का हुक्म दिया, जो साबित करता है कि ज़कात के कामों में वकील मुक़र्रर करना जायज़ है।
2. सहीह बुख़ारी 1454: अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) को ज़कात वसूल करने के लिए बहरीन भेजा, जो इस बात की और तस्दीक़ करता है कि ज़कात के मामलात के लिए किसी दूसरे को वकील बनाया जा सकता है।
नोट: वकील मुक़र्रर करने की मुमानअत पर कोई दलील मौजूद नहीं; बल्कि नबवी और ख़िलाफ़ती अमल इसकी ताईद करता है। कुछ उलमा यह तरजीह देते हैं कि ज़कात अदा करने वाला ख़ुद ज़कात तक़्सीम करे ताकि हक़दारों तक इसका पहुँचना यक़ीनी हो, लेकिन वकील मुक़र्रर करना एक दुरुस्त और अक्सर अमली तौर पर मुफ़ीद तरीक़ा है।
इख़्तितामी तंबीह: यह फ़तवा फ़राहम किए गए दलाइल पर मबनी है। बड़ी रक़म या ख़ास हालात पर मुश्तमिल पेचीदा मसाइल के लिए किसी साहिब-ए-इल्म आलिम से रुजू करें।
References
Hadith
Sahih al-Bukhari 1468; Sahih al-Bukhari 1454
Fiqh
Sahih al-Bukhari; Permanent Committee for Islamic Research and Ifta; Ibn Baz; al-Uthaymin