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Debts & Loans Jul 13, 2026

होम लोन की मौजूदगी में ज़कात

Question

मैंने माहाना क़िस्तों पर लंबी मुद्दत का होम लोन लिया है। क्या मेरी बचत लोन की पूरी अदायगी तक ज़कात से मुस्तसना (माफ़) रहेगी?

Ruling (Fatwa)

मुख़्तसर जवाब: नहीं, कोई छूट नहीं। लंबी मुद्दत के क़र्ज़ के बावजूद हाथ में मौजूद निसाब के बराबर बचत पर ज़कात फ़र्ज़ रहती है — दलीलों की रू से यही राजेह मौक़िफ़ है। ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ़ जल्द वाजिब-उल-अदा क़िस्त घटाई जा सकती है; अगर 20-30 साल का पूरा बक़ाया घटा दिया जाए तो ज़ाहिरी तौर पर मालदार लोग कभी ज़कात अदा ही न करें। तफ़सील: मकान ख़ुद, जबकि वह आपकी रिहाइश है, उस पर कोई ज़कात नहीं। क़र्ज़ और बचत का मसला मुताल्लिक़ा फ़तवे में तफ़सील से बयान हुआ है — नबी करीम ﷺ के अमल में ज़कात ज़ाहिरी माल से वसूल की जाती थी। याद रखिए: सूदी होम लोन (रेहन) सूद है और उसका मुआहदा करना हराम है; अगर ले लिया हो तो तौबा करें और जितनी जल्दी मुमकिन हो उससे निकलें — लेकिन यह गुनाह ज़कात की फ़र्ज़ियत को मुअत्तल नहीं करता; बल्कि ज़कात माल को पाक करती है। दलील: क़ुरआन 9:103; क़ुरआन 2:275, 2:278-279 और सहीह मुस्लिम 1598 (सूद); शैख़ इब्न उसैमीन: 'जिस क़र्ज़दार के पास निसाब हो वह ज़कात अदा करेगा' (मजमूअ फ़तावा, ज़कात)। पेचीदा इनफ़िरादी मसलों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजूअ करें।

References

Quran Quran 9:103; 2:278-279
Hadith Sahih Muslim 1598
Fiqh al-Uthaymin on the debtor's zakat