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Pension & GPF Jul 13, 2026

माहाना पेंशन की आमदनी पर ज़कात

Question

मुझे हर महीने पेंशन मिलती है जिसका ज़्यादातर हिस्सा घर के ख़र्च में चला जाता है। क्या इस आमदनी पर ज़कात वाजिब है?

Ruling (Fatwa)

मुख़्तसर जवाब: ज़कात आमदनी पर नहीं बल्कि बचत पर वाजिब होती है। माहाना पेंशन तनख़्वाह की तरह है: जो ख़र्च हो जाए उस पर कोई ज़कात नहीं; और जो जमा होकर आपके कुल माल को निसाब से ऊपर रखे और उस पर क़मरी साल गुज़र जाए, उस पर 2.5% ज़कात है। तफ़सील: इस्लाम में इनकम टैक्स की तर्ज़ पर कमाई पर कोई महसूल नहीं; ज़कात का ताल्लुक़ उस माल से है जो साल के आख़िर में बाक़ी रहे। अमली तरीक़ा: कोई एक हिजरी तारीख़ अपना यौम-ए-ज़कात मुक़र्रर कर लें; उस दिन बैंक बैलेंस + नक़दी + दीगर क़ाबिल-ए-ज़कात माल जोड़ें; अगर कुल रक़म निसाब (87.48 ग्राम सोने या 612.36 ग्राम चांदी की क़ीमत) से बढ़ जाए तो 2.5% अदा करें। हर महीने की आमदनी के लिए अलग-अलग हौल का हिसाब रखने की ज़रूरत नहीं — साल में एक बार हिसाब करने से बस कुछ ज़कात पेशगी अदा हो जाती है, और यह जाइज़ है। दलाइल: क़ुरआन 2:219 («कह दीजिए: जो ज़रूरत से ज़ाइद हो»); इब्न माजा 1792 (हौल); और तनख़्वाह और वक़्तन-फ़वक़्तन आने वाली आमदनी के बारे में शैख़ इब्न बाज़ और शैख़ इब्न उसैमीन का सिखाया हुआ अमली तरीक़ा। पेचीदा इनफ़िरादी मसाइल में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।

References

Quran Quran 2:219
Hadith Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani
Fiqh Ibn Baz; al-Uthaymin on salary zakat