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Stocks & Shares Jul 13, 2026

लंबी मुद्दत तक डिविडेंड के लिए रखे गए शेयरों की ज़कात

Question

मैं शेयर बेचने की नीयत से नहीं, बल्कि डिविडेंड (मुनाफ़ा) के लिए लंबी मुद्दत तक रखता हूँ। क्या इनकी ज़कात पूरी बाज़ारी क़ीमत पर होगी या किसी और तरीक़े से हिसाब की जाएगी?

Ruling (Fatwa)

मुख़्तसर जवाब: दलील पर चलने वाले उलमा ने इस मसले में दो तरीक़े बताए हैं: (क) कंपनी के क़ाबिल-ए-ज़कात असासों (नक़दी, वसूल होने वाली रक़में, माल-ए-तिजारत/स्टॉक) में अपने तनासुबी हिस्से पर 2.5% अदा करें — क्योंकि शेयरहोल्डर हक़ीक़त में कंपनी के असासों का शरीक होता है; या (ख) आसानी और एहतियात के लिए पूरी बाज़ारी क़ीमत पर 2.5% अदा करें। जब कंपनी के हिसाबात का तज्ज़िया मुश्किल हो तो तरीक़ा (ख) ही अमली और महफ़ूज़ रास्ता है; और जो डिविडेंड वसूल हो जाए वह बहरहाल नक़दी की हैसियत से क़ाबिल-ए-ज़कात है। तफ़सील: शैख़ इब्न उसैमीन का मौक़िफ़ है कि जो शेयर तिजारत के लिए न हों उनकी ज़कात कंपनी के क़ाबिल-ए-ज़कात असासों पर है, जबकि मुस्तक़िल असासे (इमारतें, मशीनरी) मुस्तसना हैं। AAOIFI शरई मेयार 35 भी तनासुबी तरीक़ा ही तजवीज़ करता है। चूँकि आम सरमायाकार शायद ही कभी बैलेंस शीट का तज्ज़िया कर पाते हैं, इसलिए बहुत से मौजूदा दौर के उलमा पूरी क़ीमत पर ज़कात अदा करने का मशवरा देते हैं — ज़ाइद मिक़दार नफ़्ली सदक़ा शुमार होगी। दलाइल: क़ुरआन 9:103; सहीह बुख़ारी 1464 (ज़ाती इस्तेमाल के असासों पर ज़कात नहीं — यही पैदावारी मुस्तक़िल असासों के इस्तिसना की बुनियाद है); शैख़ इब्न उसैमीन (मजमू फ़तावा व रसाइल, ज़कात); AAOIFI शरई मेयार 35। पेचीदा इन्फ़िरादी सूरतों में किसी मुस्तनद आलिम से रुजू करें।

References

Quran Quran 9:103
Hadith Sahih al-Bukhari 1464
Fiqh al-Uthaymin; AAOIFI Shariah Standard 35