Fatwa Library

The SGT Fatwa Library brings together verified Islamic rulings on Zakat for modern assets — cryptocurrency, stocks and shares, pension and GPF funds, real estate, and debts and loans. Each fatwa cites its Quran, Hadith, and scholarly references so you can apply the ruling with confidence, and every entry is available in six languages — বাংলা, English, العربية, اردو, Bahasa Indonesia and हिन्दी. Use the language buttons above and the filters below, then open any entry to read the full ruling and the evidence behind it.

Foundations & Conditions

ज़कात की शर्त के तौर पर मुकम्मल मिल्कियत

ज़कात के लिए 'मुकम्मल मिल्कियत' से क्या मुराद है, और इसका मुनजमिद (जमे हुए) या नाक़ाबिल-ए-रसाई माल पर क्या असर पड़ता है?

मुख़्तसर जवाब: मज़कूरा सहीह हदीसों में 'मुकम्मल मिल्कियत' (अल-मिल्क अत-तम्म) को ज़कात की शर्त के तौर पर सराहतन बयान नहीं किया गया, लेकिन उस माल पर ज़कात के आम वुजूब से जो इंसान की मिल्कियत और तसर्रुफ़ में हो (देखिए: सहीह बुख़ारी 1454…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1408; Sahih Muslim 1050• Fiqh: Based on general zakat injunctions in Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim; condition of complete ownership inferred by scholars such as Ibn Baz, al-Uthaymin, and the Permanent Committee.
Zakat al-Fitr

सदक़ा-ए-फ़ित्र: वुजूब और किन लोगों पर अदा करना लाज़िम है

सदक़ा-ए-फ़ित्र किस पर अदा करना वाजिब है, और क्या घर का सरबराह अपने ज़ेर-ए-किफ़ालत लोगों की तरफ़ से अदा करेगा?

मुख़्तसर जवाब: सदक़ा-ए-फ़ित्र हर मुसलमान पर वाजिब है, चाहे मर्द हो या औरत, छोटा हो या बड़ा, आज़ाद हो या ग़ुलाम, जो अदा करने की इस्तिताअत रखता हो। घर का सरबराह अपने उन ज़ेर-ए-किफ़ालत लोगों की तरफ़ से अदा करने का ज़िम्मेदार है जिनके पास…
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Hadith: Sahih Muslim 985b; Sahih al-Bukhari 1504; Sahih al-Bukhari 1503• Fiqh: Based on Sahih al-Bukhari (1503, 1504) and Sahih Muslim (985b); the practice of the Companions; evidence-based position of Ibn Baz, al-Uthaymin, and the Permanent Committee.
Zakat al-Fitr

सदक़ा-ए-फ़ित्र: नक़द या खाना?

क्या मैं सदक़ा-ए-फ़ित्र की क़ीमत नक़द रक़म के तौर पर अदा कर सकता हूँ, या इसे ग़ल्ला (अनाज) ही की शक्ल में देना ज़रूरी है?

मुख़्तसर जवाब: सहीह सुन्नत का तक़ाज़ा यह है कि सदक़ा-ए-फ़ित्र खाने (बुनियादी ग़िज़ाओं जैसे खजूर, जौ, किशमिश, पनीर या मक़ामी बुनियादी ग़ल्ले) की शक्ल में अदा किया जाए, नक़द रक़म की शक्ल में नहीं। नबी करीम ﷺ और आपके सहाबा हमेशा एक साअ' खा…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1510; Sahih Muslim 985b• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee of Islamic Research and Ifta
Zakat al-Fitr

सदक़ा-ए-फ़ित्र की मिक़दार: एक साअ

सदक़ा-ए-फ़ित्र की मिक़दार कितनी है — एक साअ किलोग्राम में कितना होता है, और किस ग़िज़ा से अदा किया जाए?

मुख़्तसर जवाब: सदक़ा-ए-फ़ित्र एक साअ उस इलाक़े की मुरव्वजा बुनियादी ग़िज़ा से अदा करना वाजिब है। साअ पैमाना (हज्म की मिक़दार) है; किलोग्राम में इसका वज़न ग़िज़ा की क़िस्म के मुताबिक़ मुख़्तलिफ़ होता है, अलबत्ता उलमा एक साअ को गेहूँ या चावल क…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1511; Sahih Muslim 985b; Sahih Muslim 984c; Sahih al-Bukhari 1508; Sahih al-Bukhari 1510• Fiqh: Sahih al-Bukhari; Sahih Muslim
Cash, Bank & Savings

मोबाइल मनी (बीकैश/नगद) बैलेंस पर ज़कात

मैं बीकैश और नगद वॉलेट में पैसे रखता हूँ — क्या इस बैलेंस पर ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ, मोबाइल मनी (बीकैश/नगद) बैलेंस पर ज़कात वाजिब है, बशर्ते वह निसाब (कम से कम मिक़दार) तक पहुँच जाए और पूरे एक क़मरी साल (हौल) तक आपकी मिल्कियत में रहे। यह बैलेंस नक़द बचत के हुक्म में है और माल की ज़कात के आम…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih al-Bukhari 1468; Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1405; Sahih Muslim 988a; Sahih Muslim 983• Fiqh: Ibn Baz, al-Uthaymin, Permanent Committee for Islamic Research and Ifta; based on Qur'an and Sahih Hadith (no madhhab taqlid)
Cash, Bank & Savings

इस्लामी बैंक की मुदारबा डिपॉज़िट पर ज़कात

मेरा पैसा एक इस्लामी बैंक के मुदारबा बचत खाते में है — इस पर और इसके मुनाफ़े पर ज़कात कैसे निकाली जाएगी?

संक्षिप्त उत्तर: मुदारबा बचत खाते की असल रक़म और उसके मुनाफ़े पर ज़कात वाजिब है, बशर्ते दोनों का कुल योग निसाब (कम से कम हद) तक पहुँच जाए और उस पर एक क़मरी (चाँद का) साल गुज़र जाए। मुनाफ़े को माल ही का हिस्सा माना जाता है, इसलिए अ…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:34-35• Hadith: Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1405• Fiqh: Majority of scholars including Ibn Baz, al-Uthaymin, and the Permanent Committee for Islamic Research and Ifta based on Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim evidences.
Cash, Bank & Savings

तोहफ़ा, ईदी और इनामी रक़म की ज़कात

तोहफ़े, ईदी या किसी जायज़ इनाम के तौर पर मिलने वाली रक़म मेरी बचत में जमा होती रहती है — इसकी ज़कात कैसे शुमार की जाए?

मुख़्तसर जवाब: तोहफ़े, ईदी और इनामी रक़म आपके माल का हिस्सा हैं। जब ये दूसरी बचत के साथ मिलकर निसाब (कम से कम हद) तक पहुँच जाएँ और उन पर पूरा क़मरी साल (हौल) गुज़र जाए, तो उन पर ज़कात वाजिब हो जाती है। तफ़सील: ज़कात का आम वुजूब …
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1408; Sahih Muslim 988a; Sahih Muslim 983• Fiqh: Based on general evidences from Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim; Ibn Baz, al-Uthaymin, Permanent Committee
Cash, Bank & Savings

रखी हुई विदेशी करेंसी पर ज़कात

मेरे पास अमेरिकी डॉलर और दूसरी विदेशी करेंसी है — किस दर से और कैसे ज़कात अदा करूँ?

मुख़्तसर जवाब: विदेशी करेंसी नक़द माल के हुक्म में है जिस पर ज़कात फ़र्ज़ है। अगर उसकी कुल क़ीमत निसाब (85 ग्राम सोने या 595 ग्राम चाँदी के बराबर) तक पहुँच जाए और एक पूरा क़मरी (चाँद का) साल आपके पास रहे, तो आप पर उसकी क़ीमत का 2.5%…
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Quran: Surah Ar-Rum 30:39• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1448; Sahih al-Bukhari 1466• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
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अपने सारे पैसे की ज़कात के लिए एक सालाना तारीख़ तय करना

मेरी आमदनी साल भर आती रहती है — मैं हर रक़म के हौल (एक साल) को अलग-अलग गिनने के बजाय एक तय ज़कात की तारीख़ कैसे मुक़र्रर करूँ?

संक्षिप्त उत्तर: आप अपनी सारी बचत के लिए एक सालाना तारीख़ चुन सकते हैं, लेकिन हौल (एक क़मरी साल) की शर्त का ख़याल रखना ज़रूरी है। बेहतरीन तरीक़ा यह है कि हर रक़म के हौल को अलग-अलग गिना जाए, लेकिन अगर यह मुश्किल हो तो आप एक तारीख़ (…
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Quran: Surah At-Tawbah 9:71• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454; Sahih Muslim 987a• Fiqh: Based on general zakat evidence from Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim; practice of early Muslims (not detailed in evidence). Acceptable alternative: unified date method.
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आपातकालीन या मुश्किल वक़्त के फ़ंड पर ज़कात

मैं सिर्फ़ आपात स्थिति के लिए एक फ़ंड अलग रखता हूँ — क्या फिर भी उस पर ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ, आपातकालीन या मुश्किल वक़्त के फ़ंड पर ज़कात वाजिब है अगर वह निसाब तक पहुँच जाए और एक क़मरी साल (हौल) तक आपकी मिल्कियत में रहे। तफ़्सील: ज़कात माल पर एक फ़र्ज़ इबादत है, और जिस मक़्सद के लिए माल तय किया जाए उससे इ…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1468; Sahih Muslim 987a; Sahih Muslim 988a; Sahih al-Bukhari 1405• Fiqh: Sahih al-Bukhari 1405, 1454; Sahih Muslim 987a, 988a
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बैंक अकाउंट और बचत बैलेंस पर ज़कात

अपने करंट और सेविंग्स बैंक अकाउंट में मौजूद रक़म की ज़कात कैसे अदा करूँ?

मुख़्तसर जवाब: बैंक अकाउंट (करंट और सेविंग्स) में मौजूद रक़म पर ज़कात वाजिब है, बशर्ते वह निसाब तक पहुँच जाए और एक क़मरी (चांद्र) साल आपकी मिल्कियत में रहे। नक़दी का निसाब चांदी पर आधारित है: पाँच औक़िया (लगभग 595 ग्राम चांदी) या उ…
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Hadith: Sahih al-Bukhari 1404; Sahih al-Bukhari 1403; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih al-Bukhari 1395• Fiqh: Sahih al-Bukhari, Sahih Muslim; as understood by the Salaf and Ahl al-Hadith scholars
Cash, Bank & Savings

घर में रखी नक़दी की ज़कात

क्या घर में रखी हुई नक़दी पर ज़कात वाजिब है, और रक़म जमा करके रखने पर कोई चेतावनी है?

संक्षिप्त उत्तर: जी हाँ, घर में रखी नक़दी पर ज़कात वाजिब है अगर वह निसाब को पहुँच जाए और उस पर एक क़मरी (चांद्र) साल गुज़र जाए। ज़कात अदा किए बिना रक़म जमा करके रखने पर सख़्त अज़ाब की चेतावनी है। तफ़सील: नक़दी (सोना और चांदी) पर सहीह…
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Hadith: Sahih Muslim 987a; Sahih al-Bukhari 1402; Sahih al-Bukhari 1405; Sahih al-Bukhari 1454; Sahih Muslim 992a; Sahih al-Bukhari 1468• Fiqh: Major Salafi scholars (Ibn Baz, al-Uthaymin, Permanent Committee)
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