The SGT Fatwa Library brings together verified Islamic rulings on Zakat for modern assets — cryptocurrency,
stocks and shares, pension and GPF funds, real estate, and debts and loans. Each fatwa cites its Quran,
Hadith, and scholarly references so you can apply the ruling with confidence, and every entry is available
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Debts & Loans
ज़ामिन (गारंटर) की ज़िम्मेदारी और ज़कात
मैंने अपने भाई के बैंक क़र्ज़ की ज़मानत दी है। क्या यह ज़िम्मेदारी मेरी ज़कात के हिसाब को कम करेगी? और अगर वह नादेहिंदा (डिफ़ॉल्ट) हो जाए तो मैं क्या करूँ?
मुख़्तसर जवाब: (1) ज़मानत एक मशरूत (मुअल्लक़) ज़िम्मेदारी है — जब तक असल क़र्ज़दार अदायगी करता रहे, आपके माल से कुछ नहीं निकला; इसलिए इसका आपकी ज़कात पर कोई असर नहीं — पूरे माल की ज़कात हस्बे-मामूल वाजिब है। (2) अगर वह नादेहिंदा हो …
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Quran: Quran 9:103; 9:60• Hadith: Abu Dawud 3565; Tirmidhi 1265• Fiqh: al-Uthaymin on contingent liabilities
Debts & Loans
क्या क़र्ज़-ए-हसना देने से ज़कात कम हो जाती है?
मैं सवाब की उम्मीद पर क़र्ज़-ए-हसना देता हूँ। यह रक़म तो मेरे हाथ में नहीं — क्या यह मेरी ज़कात के हिसाब से निकल जाएगी? और क्या क़र्ज़ देने पर सदक़े जैसा सवाब मिलता है?
मुख़्तसर जवाब: (1) नहीं — ख़ुशहाल और वापसी के यक़ीनी क़र्ज़दार को दिया गया क़र्ज़ आपका ही माल है (मज़बूत दैन): वह हर साल आपकी ज़कात के हिसाब में शामिल रहेगा; क़र्ज़ देना ज़कात कम करने का रास्ता नहीं। अगर वापसी मशकूक (कमज़ोर दैन) हो जाए त…
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Quran: Quran 2:245, 2:282; 57:11• Hadith: Sahih Muslim 2699• Fiqh: athar of Uthman; Permanent Committee
Debts & Loans
अपना क़र्ज़ वसूल करने के लिए ज़कात देना
मेरा एक शख़्स पर क़र्ज़ है और वह अदा नहीं कर पा रहा। मैंने सुना है कि कुछ लोग क़र्ज़दार को ज़कात देकर कहते हैं: 'अब इसी से मेरा क़र्ज़ चुका दो' — यूँ ज़कात भी अदा हो जाती ह…
मुख़्तसर जवाब: अगर शर्त लगा दी जाए तो यह बातिल है — 'मैं तुम्हें ज़कात देता हूँ, तुम इससे मेरा क़र्ज़ चुकाओ' जैसा मुआहदा या समझौता ज़कात के तौर पर दुरुस्त नहीं, क्योंकि हक़ीक़ी तमलीक (बिना शर्त मिल्कियत की मुंतक़ली) हुई ही नहीं; दरअसल …
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Quran: Quran 9:60; 2:280• Hadith: Sahih al-Bukhari 1• Fiqh: majority; Permanent Committee; al-Uthaymin
Debts & Loans
सूदी क़र्ज़ में डूबे हुए शख़्स को ज़कात देना
एक रिश्तेदार एनजीओ/बैंक के सूदी क़र्ज़ों के जाल में फँस गया है — क़िस्त पर क़िस्त बढ़ती जा रही है। क्या उसे ज़कात की रक़म दी जा सकती है?
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ — तंगदस्त क़र्ज़दार (ग़ारिम) ज़कात की क़ुरआन में मुक़र्रर की हुई मद है; अगरचे क़र्ज़ सूदी मुआहदे पर हो, जो शख़्स वाक़ई अदायगी से आजिज़ हो और सच्चे दिल से इस जाल से निकलना चाहता हो, उसे असल क़र्ज़ और चढ़े हुए बोझ की अदायग…
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Quran: Quran 9:60; 5:2• Hadith: Sahih Muslim 1044• Fiqh: Ibn Baz on aiding the indebted
Debts & Loans
मरहूम की अदा न की गई ज़कात: वारिसों पर क्या लाज़िम है
हमें मालूम है कि वालिद साहब वफ़ात से पहले कई साल की ज़कात अदा नहीं कर सके। क्या हम वारिसों पर उसकी अदायगी लाज़िम है? और किस माल से?
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ — अदा न की गई ज़कात मरहूम के ज़िम्मे क़र्ज़ है, बल्कि सबसे भारी क़र्ज़: तक़सीम से पहले पूरे तरके से उसकी अदायगी वारिसों पर फ़र्ज़ है, वसीयत हो या न हो। तरतीब यह है: कफ़न-दफ़न के अख़राजात → क़र्ज़ (अल्लाह के हुक़ूक़: ज़कात/क…
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Quran: Quran 4:11• Hadith: Bukhari 1953, 2738• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin on estate liabilities
Debts & Loans
बक़ाया तनख़्वाह और उजरत की ज़कात
मेरे आजिर के ज़िम्मे कई महीनों की तनख़्वाह बाक़ी है, और एक क्लाइंट पर फ़्रीलांस काम के बिल वाजिबुल-अदा हैं। क्या मुझे इन वाजिबात की ज़कात अभी देनी होगी?
मुख़्तसर जवाब: वाजिबात की नौइयत के एतबार से: (क) ख़ुशहाल, इक़रार करने वाले आजिर/क्लाइंट के ज़िम्मे वाजिबात — जो अदा करेगा, बस देर से — मज़बूत क़र्ज़ हैं: उन्हें हर साल अपने हिसाब में शामिल करें (या वुसूली पर जमा-शुदा सालों की ज़कात …
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 2443; Bukhari 2227• Fiqh: Permanent Committee on classes of receivables
Debts & Loans
क़र्ज़ ली हुई रक़म हाथ में मौजूद हो तो ज़कात
मैंने कारोबार के लिए एक बड़ी रक़म क़र्ज़ ली, मगर वह अब तक मेरे अकाउंट में पड़ी है — साल भी गुज़र चुका है। क्या क़र्ज़ की रक़म पर ज़कात वाजिब है?
मुख़्तसर जवाब: जी हाँ — क़र्ज़ लेते ही वह रक़म आपकी मिल्कियत बन जाती है (क़र्ज़ का मक़सद ही यही है कि आपको उसे ख़र्च करने का हक़ हासिल हो जाए); ज़िम्मे पर देन होने के बावजूद हाथ में मौजूद इस माल पर, जब निसाब और हौल मुकम्मल हो जाएँ, ज़कात…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1395, 2393• Fiqh: al-Uthaymin on the debtor's zakat
Cryptocurrency
हराम तरीक़ों से कमाई गई क्रिप्टो — क्या ज़कात उसे पाक कर देती है?
पहले मैंने जुए की वेबसाइटों और स्कैम स्कीमों के ज़रिए क्रिप्टो कमाई। अब मैं तौबा करना चाहता हूँ — क्या उस पर ज़कात अदा करने से यह माल पाक हो जाएगा?
मुख़्तसर जवाब: नहीं। ज़कात हलाल माल को पाक करती है; हराम कमाई का इलाज ज़कात नहीं बल्कि उससे पूरी तरह दस्तबरदार होना है: (क) जो माल पहचाने जा सकने वाले पीड़ितों से धोखे के ज़रिए लिया गया हो, उसे उन्हीं को लौटाना वाजिब है; (ख) जहा…
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Quran: Quran 2:188; 5:90• Hadith: Muslim 1015; Bukhari 1410• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz on divesting haram wealth
Cryptocurrency
परिवार की साझा क्रिप्टो होल्डिंग पर ज़कात
मैं, मेरी बीवी और भाई मिलकर एक ही अकाउंट में क्रिप्टो ख़रीदते हैं — किसी एक का हिस्सा अकेले निसाब तक नहीं पहुँचता, लेकिन सब मिलाकर पहुँच जाता है। क्या ज़कात वाजिब हो…
मुख़्तसर जवाब: नक़दी क़िस्म के माल में हर मालिक का हिस्सा अलग-अलग गिना जाएगा — चाहे साझा अकाउंट में ही क्यों न हो। जिसका हिस्सा (उसके दूसरे माल समेत) निसाब तक न पहुँचे, उस पर कुछ वाजिब नहीं; और जिसका पहुँच जाए, वह अपने हिस्से का…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1450, 1405• Fiqh: majority; al-Uthaymin on khultah
Cryptocurrency
माइनिंग मशीनों की ज़कात
मैंने महंगे माइनिंग रिग/GPU ख़रीदे हैं। क्या ज़कात इन मशीनों की क़ीमत पर वाजिब है, या सिर्फ़ माइन किए गए कॉइनों पर?
मुख़्तसर जवाब: मशीनों की क़ीमत पर कोई ज़कात नहीं — माइनिंग रिग पैदावार के ज़राए हैं, कारीगर के औज़ार या कारख़ाने की मशीनों जैसे मुस्तक़िल असासे। ज़कात पैदावार पर है: माइन किए गए कॉइन आपकी आमदनी हैं — अपने सालाना ज़कात के दिन ग़ैर-ब…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1464• Fiqh: al-Uthaymin; Permanent Committee on productive assets
Cryptocurrency
क़र्ज़ के लिए क्रिप्टो गिरवी रखने की सूरत में ज़कात
मैंने बिटकॉइन बतौर ज़मानत गिरवी रखकर स्टेबलकॉइन में क़र्ज़ लिया है। गिरवी रखे हुए कॉइन और क़र्ज़ में मिली रक़म — दोनों पर ज़कात का हुक्म क्या होगा?
मुख़्तसर जवाब: (1) गिरवी रखा हुआ बिटकॉइन अब भी आपकी मिल्कियत है — रहन (गिरवी) ज़कात को नहीं रोकता; अपने ज़कात के दिन उसकी बाज़ारी क़ीमत हिसाब में शामिल करें। (2) क़र्ज़ में मिले हुए स्टेबलकॉइन जो आपके हाथ में हैं, वे आपके क़ब्ज़े का …
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Quran: Quran 2:283; 9:103• Hadith: Bukhari 2068; Muslim 1598• Fiqh: al-Uthaymin on debt and pledged assets
Cryptocurrency
DeFi लेंडिंग और लिक्विडिटी पूल
DeFi प्लेटफ़ॉर्म पर कॉइन 'लेंड' करने या लिक्विडिटी देने से सूद जैसा रिटर्न मिलता है। क्या यह जाइज़ है? और जमा किए गए कॉइनों की ज़कात का क्या हुक्म है?
मुख़्तसर जवाब: (1) DeFi 'लेंडिंग' — तयशुदा या घटते-बढ़ते अतिरिक्त रिटर्न के बदले कॉइन क़र्ज़ देना — क़र्ज़ पर शर्त लगाई गई बढ़ोतरी है, यानी रिबा (सूद): नाजाइज़। (2) लिक्विडिटी पूल / यील्ड फ़ार्मिंग: बनावट के हिसाब से हुक्म अलग-अलग है — ले…
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Quran: Quran 2:275, 2:279• Hadith: Muslim 1598, 1513• Fiqh: contemporary scholars on riba/gharar