Fatwa Library

The SGT Fatwa Library brings together verified Islamic rulings on Zakat for modern assets — cryptocurrency, stocks and shares, pension and GPF funds, real estate, and debts and loans. Each fatwa cites its Quran, Hadith, and scholarly references so you can apply the ruling with confidence, and every entry is available in six languages — বাংলা, English, العربية, اردو, Bahasa Indonesia and हिन्दी. Use the language buttons above and the filters below, then open any entry to read the full ruling and the evidence behind it.

Cryptocurrency

एयरड्रॉप और मुफ़्त टोकनों की ज़कात

मुझे विभिन्न प्रोजेक्ट्स के एयरड्रॉप से मुफ़्त टोकन मिलते हैं — कुछ की बाज़ारी क़ीमत है और कुछ तो बेचे भी नहीं जा सकते। इनकी ज़कात कैसे अदा की जाए?

मुख़्तसर जवाब: एयरड्रॉप हिबा (तोहफ़े) के तौर पर मिलने वाला माल है — जिस दिन मिला उसी दिन से आपकी मिल्कियत है। जिन टोकनों की असली बाज़ारी क़ीमत हो और वे बेचे जा सकते हों, वे आपके दूसरे नक़दी क़िस्म के माल में शामिल होंगे और आपके स…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: al-Uthaymin on newly acquired wealth
Stocks & Shares

नौकरी में मिलने वाले शेयरों और RSU की ज़कात

मेरी कंपनी शेयर/RSU देती है — कुछ अभी वेस्ट (vest) नहीं हुए, कुछ लॉक-इन में हैं। किस हिस्से पर ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: (क) ग़ैर-वेस्टेड RSU: अभी आप उनके मालिक ही नहीं — नौकरी छोड़ने पर ख़त्म हो जाते हैं — इसलिए उन पर ज़कात नहीं। (ख) वेस्टेड शेयर: आपका माल हैं — उन पर ज़कात वाजिब है। (ग) वेस्टेड मगर लॉक-इन: मिल्कियत मुकम्मल है, इसलिए र…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Ibn Majah 1792, sahih per al-Albani• Fiqh: al-Uthaymin; Permanent Committee on complete ownership
Stocks & Shares

मिली-जुली कंपनियों के शेयर: ज़कात और माल की तत्हीर

जिस कंपनी का बुनियादी कारोबार हलाल हो मगर उसमें कुछ सूदी आमदनी या क़र्ज़ शामिल हो, उसके शेयरों में सरमाया लगाने और उन पर ज़कात अदा करने का क्या हुक्म है?

मुख़्तसर जवाब: अगर कंपनी का बुनियादी कारोबार ही हराम हो (सूदी बैंकिंग, शराब, जुआ) तो उसके शेयरों की ख़रीद-फ़रोख़्त सरासर नाजाइज़ है। अगर बुनियादी कारोबार हलाल हो मगर सूदी लेन-देन से मिला हुआ हो, तो तक़वा का तक़ाज़ा है कि उससे बचा…
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Quran: Quran 2:275, 2:279; 5:2• Hadith: Sahih Muslim 1015• Fiqh: contemporary scholars; shariah screening standards
Stocks & Shares

म्यूचुअल फ़ंड और इंडेक्स फ़ंड की ज़कात

मैंने म्यूचुअल फ़ंड या इंडेक्स फ़ंड के यूनिटों में सरमायाकारी की है। इनकी ज़कात कैसे अदा करूँ?

मुख़्तसर जवाब: फ़ंड के यूनिट दरअसल उनके पीछे मौजूद शेयर-असासों की नुमाइंदगी करते हैं, इसलिए उनका हुक्म भी वही है जो शेयरों का है। अगर यूनिट कैपिटल गेन (मुनाफ़े पर बेचने) की नीयत से रखे हों तो ज़कात के दिन उनकी पूरी NAV/बाज़ारी…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1• Fiqh: AAOIFI Std 35; Permanent Committee
Stocks & Shares

मिले हुए डिविडेंड की ज़कात

मुझे हर साल कंपनी से कैश डिविडेंड मिलता है। क्या उस पर अलग से ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: डिविडेंड जब मिल जाए तो वह आम नक़दी है जो आपके बाक़ी पैसों में शामिल हो जाती है। इसकी कोई अलग दर नहीं — आपके सालाना ज़कात के दिन जो कुछ बाक़ी रहे, वह आपकी कुल नक़दी के हिस्से के तौर पर 2.5% के हिसाब से अदा होगा। …
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454• Fiqh: al-Uthaymin on mid-year income
Stocks & Shares

लंबी मुद्दत तक डिविडेंड के लिए रखे गए शेयरों की ज़कात

मैं शेयर बेचने की नीयत से नहीं, बल्कि डिविडेंड (मुनाफ़ा) के लिए लंबी मुद्दत तक रखता हूँ। क्या इनकी ज़कात पूरी बाज़ारी क़ीमत पर होगी या किसी और तरीक़े से हिसाब की जाएगी?

मुख़्तसर जवाब: दलील पर चलने वाले उलमा ने इस मसले में दो तरीक़े बताए हैं: (क) कंपनी के क़ाबिल-ए-ज़कात असासों (नक़दी, वसूल होने वाली रक़में, माल-ए-तिजारत/स्टॉक) में अपने तनासुबी हिस्से पर 2.5% अदा करें — क्योंकि शेयरहोल्डर हक़ीक़त में…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Sahih al-Bukhari 1464• Fiqh: al-Uthaymin; AAOIFI Shariah Standard 35
Stocks & Shares

तिजारत की नीयत से ख़रीदे गए शेयरों की ज़कात

मैं शेयर इस नीयत से ख़रीदता हूँ कि क़ीमत बढ़ने पर बेच दूँगा। इन शेयरों की ज़कात का हिसाब कैसे करूँ?

मुख़्तसर जवाब: दोबारा बेचने की नीयत से रखे गए शेयर माल-ए-तिजारत (उरूज़ अत-तिजारा) हैं। अपने ज़कात के दिन पोर्टफ़ोलियो की पूरी बाज़ारी क़ीमत (मार्केट वैल्यू) का 2.5% अदा करें — ख़रीद की क़ीमत पर नहीं। तफ़सील: जमा हुआ मुनाफ़ा (डिविडें…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1454• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz; AAOIFI Std 35
Real Estate

खेती की ज़मीन और फ़सलों की ज़कात (उश्र)

गाँव में मेरी धान की ज़मीन है। ज़मीन और उसकी फ़सल की ज़कात कैसे अदा करूँ?

मुख़्तसर जवाब: ज़मीन की क़ीमत पर ज़कात नहीं (सिवाय इसके कि वह बेचने की तिजारती नीयत से रखी गई हो)। ज़कात फ़सल पर है, जो कटाई के दिन ही वाजिब हो जाती है और इसके लिए हौल शर्त नहीं: अगर फ़सल बारिश या क़ुदरती ज़रियों से सींची गई हो तो…
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Quran: Quran 6:141; 2:267• Hadith: Bukhari 1483, 1405; Muslim 979• Fiqh: consensus on ushr; Ibn Baz
Real Estate

क़िस्तों पर बुक किए गए फ़्लैट की ज़कात

मैंने एक डेवलपर के पास फ़्लैट बुक करा रखा है और क़िस्तें अदा कर रहा हूँ; अभी हैंडओवर नहीं हुआ है। क्या ज़कात अदा की गई क़िस्तों पर वाजिब है या फ़्लैट पर?

मुख़्तसर जवाब: इसका दारोमदार मक़सद पर है। (अ) अगर अपनी रिहाइश के लिए हो: तो न अदा की गई क़िस्तों पर ज़कात है न फ़्लैट पर — अदा की गई रक़म अब आपकी मिल्कियत नहीं रही, और फ़्लैट ज़ाती इस्तेमाल का माल है। (ब) अगर नफ़े पर बेचने की नीयत हो:…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Bukhari 1, 1464• Fiqh: Permanent Committee on real-estate zakat
Real Estate

ग़ैर-मुतअय्यन नीयत वाली जायदाद की ज़कात

मैंने ज़मीन ख़रीदी है मगर अभी तय नहीं किया कि क्या करूँगा — अच्छी क़ीमत मिले तो बेच भी सकता हूँ और मकान भी बना सकता हूँ। क्या इस हालत में ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: नहीं। माल-ए-तिजारत की ज़कात के लिए तिजारत की पक्की और साफ़ नीयत शर्त है। 'बेच भी सकता हूँ, रख भी सकता हूँ' — इस दुविधा की हालत में ज़मीन आम मिल्कियत के असल हुक्म पर रहती है, जिस पर कोई ज़कात नहीं। जिस दिन आप पक्के इ…
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Quran: Quran 2:286• Hadith: Bukhari 1, 1464; Muslim 1907• Fiqh: al-Uthaymin on firm trade intention
Real Estate

दोबारा बेचने की नीयत से ख़रीदी गई जायदाद की ज़कात

मैंने मुनाफ़े पर बेचने की नीयत से ज़मीन ख़रीदी थी — बरसों से बिक नहीं पाई। क्या मुझ पर हर साल इसकी ज़कात वाजिब है?

मुख़्तसर जवाब: जी हाँ। बेचने की पक्की नीयत से ख़रीदी गई ज़मीन या फ़्लैट उरूज़े-तिजारत (कारोबारी माल) हैं — हर साल आपके ज़कात के दिन उस दिन की बाज़ारी क़ीमत का 2.5% अदा करना वाजिब है, चाहे वह कितने ही साल बिना बिके पड़ी रहे। तफ़सील:…
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Quran: Quran 2:267• Hadith: Sahih al-Bukhari 1• Fiqh: Permanent Committee; Ibn Baz
Real Estate

किराए पर दी गई जायदाद की ज़कात

मैं एक फ़्लैट किराए पर देता हूँ। क्या ज़कात फ़्लैट की क़ीमत पर होगी या किराए पर?

मुख़्तसर जवाब: फ़्लैट की क़ीमत पर नहीं — ज़कात किराए से जमा हुई रक़म पर वाजिब होती है। आपके ज़कात के दिन किराए की जो बचत (आपकी दूसरी नक़दी के साथ मिलाकर) निसाब से ऊपर हो, उस पर 2.5% ज़कात अदा की जाएगी। तफ़सील: किराए पर दी गई जायद…
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Quran: Quran 9:103• Hadith: Bukhari 1464, 1454; Ibn Majah 1792• Fiqh: Ibn Baz; al-Uthaymin; Permanent Committee
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